जीत हमारी, गिनती बाद में; CDS ने पाक को सुनाया कड़वा सच!
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करना जानती है, बल्कि आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में भी पीछे नहीं हटती। पुणे यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से खुलकर बातें कीं। उन्होंने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते" और भारत अब आतंकवाद के साए में जीने वाला देश नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की सोच: आतंकवाद पर चोट :
सीडीएस चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश था—पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अब भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "हमने आतंकवाद और पानी को जोड़ा है। अब से आतंकवाद के खिलाफ हमारी प्रतिक्रिया और भी कठोर होगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में युद्ध और राजनीति दोनों समानांतर रूप से चल रही थीं। पाकिस्तान का मकसद भारत को 'हजारों जख्म' देना था, लेकिन इस बार भारत ने पहले से कहीं अधिक सख्त और सुनियोजित प्रतिक्रिया दी।
"कितने विकेट गिरे, ये नहीं... जीत हुई ये मायने रखता है"
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों को हुए नुकसान पर एक सवाल के जवाब में सीडीएस चौहान ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा, "कोई टीम किस तरह मैच जीतती है, ये महत्वपूर्ण नहीं है। जब टीम जीतती है, तो कोई नहीं पूछता कि कितने विकेट गिरे।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक पेशेवर सैन्य बल कभी भी नुकसान के आँकड़ों से नहीं डरता। मिशन की सफलता ही सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
पाकिस्तान की 48 घंटे की योजना, 8 घंटे में टूटी कमर :
सीडीएस चौहान के अनुसार, पाकिस्तान ने सोचा था कि वह भारत के खिलाफ 48 घंटे तक जवाबी अभियान चलाएगा, लेकिन भारतीय सेना की सटीक और तेज कार्रवाई से पाकिस्तान की योजना महज 8 घंटे में ही ध्वस्त हो गई।
उन्होंने बताया कि 10 मई की रात को पाकिस्तान ने भारत को बातचीत का प्रस्ताव दिया, क्योंकि उसे डर था कि यदि भारत का हमला यूं ही जारी रहा, तो उसे भारी सैन्य और रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान के 'तनाव कम करने के प्रस्ताव' को भारत ने मानवीय दृष्टिकोण से स्वीकार किया।
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CDS की चेतावनी: आतंकवाद के खिलाफ अब नई रेखा खींची
जनरल चौहान ने अपने बयान में साफ कहा कि भारत ने अब आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की एक "नई रेखा" खींच दी है। उन्होंने कहा, "अब से कोई भी हमला सिर्फ निंदा का कारण नहीं बनेगा, बल्कि जवाबी कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी।"
CDS अनिल चौहान का यह बयान न केवल भारत की सैन्य नीति में आए बदलाव को दर्शाता है, बल्कि यह पाकिस्तान और अन्य दुश्मन देशों को भी साफ संदेश देता है—भारत अब हर हमले का जवाब उसी भाषा में देगा। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक कार्रवाई नहीं थी, यह भारत की नई रणनीतिक सोच की शुरुआत है।
Editorial

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