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RSS को मायावती का बयान; संविधान से मत खेलो वरना ...
By EditorialPublished on 28 Jun 2025 5:30 AM IST
भाषा के नाम पर राजनीति नहीं चलेगी, सभी भाषाओं को मिले बराबर सम्मान: मायावती बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश में बढ़ती भाषाई राजनीति को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में भाषा को राजनीति का मुद्दा बनाना गलत है, और सभी भारतीय भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए। उनका यह बयान भाषाई विवादों को लेकर चल रही बहस के बीच अहम माना जा रहा है।

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संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्दों को हटाने की RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले की मांग पर देश की राजनीति में उबाल आ गया है। अब इस बहस में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी कूद पड़ी हैं। उन्होंने इस बयान को संविधान की आत्मा के साथ खिलवाड़ बताया है और कहा कि संविधान से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘मूल भावना से ना हो खिलवाड़’ – मायावती
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समय-समय पर संविधान में गैर जरूरी बदलाव किए गए हैं, लेकिन संविधान की मूल भावना जो प्रस्तावना में झलकती है, उसमें छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि कुछ पार्टियों के दिल में कुछ और होता है और जुबान पर कुछ और, लेकिन अब जनता को जागरूक होकर संविधान विरोधी मानसिकता के खिलाफ खड़ा होना होगा।
मायावती ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "अगर ये संविधान विरोधी चेहरे नहीं बदलते, तो हमें आना होगा और अपनी आवाज पूरे देश में बुलंद करनी होगी।"
बीजेपी और कांग्रेस को बताया ‘एक ही थाली के चट्टे-बट्टे’
बीएसपी प्रमुख ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये दोनों पार्टियां संविधान को लेकर दोहरा चरित्र अपनाती हैं। “कांग्रेस और बीजेपी ने कभी बाबा साहब के संविधान पर पूरी आस्था नहीं दिखाई। ये दोनों पार्टियां ज़रूरत के हिसाब से संविधान की मूल भावना से हटती हैं और संकीर्ण विचारधाराओं को बढ़ावा देती हैं।”
भाषा और क्षेत्रीयता पर भी बोलीं मायावती :
संविधान और राजनीति के साथ-साथ भाषाई राजनीति पर भी मायावती ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि “देश के कई राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नहीं है। सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए और क्षेत्रीयता के नाम पर टकराव से बचना जरूरी है।” सरकार और राजनीतिक दलों के बीच टकराव को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति में संविधान की मर्यादा को नजरअंदाज करना देश के हित में नहीं है।
चुनाव आयोग पर भी सवाल :
बिहार में वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे पर भी मायावती ने आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और सभी दलों को भरोसे में लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
क्या बोले थे होसबोले ?
बता दें कि आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने 27 जून 2025 को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया था कि संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द हटाए जाने चाहिए। उन्होंने इन्हें आपातकाल के दौरान जोड़े गए कृत्रिम शब्द बताया था और कहा था कि इनकी संविधान में जरूरत नहीं है।
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आगे की राजनीति में असर तय :
अब जब इस मुद्दे पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के साथ-साथ विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, तो यह बहस सिर्फ वैचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रणभूमि बनती जा रही है। मायावती का खुला विरोध इस बात का संकेत है कि आगामी चुनावी माहौल में संविधान और उसकी प्रस्तावना एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

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