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गिरावट या उछाल? गोल्ड मार्केट में मची हलचल..
By EditorialPublished on
गोल्ड की रफ्तार धीमी, बाजार में डर घटा तो सोने की चमक भी फिकी पड़ी हाल के हफ्तों में सोने की कीमतों में आई तेजी अब थमती नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने से निवेशकों का रुख भी थोड़ा बदल गया है। अमेरिका में टैरिफ को लेकर चिंता कम हुई है और इजरायल-ईरान टकराव भी महज 12 दिनों में शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया है, जिससे बाजार में डर का माहौल हल्का हुआ है। इसका सीधा असर सोने की मांग और कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

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दो सालों में करीब 100 फीसदी रिटर्न देने के बाद अब सोने की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। अक्टूबर 2022 में जहां गोल्ड की कीमत 1630 डॉलर प्रति औंस थी, वहीं अब यह 3260 डॉलर प्रति औंस तक जा पहुंची। यानी सिर्फ 28 महीनों में सोना दोगुना हो गया। लेकिन बीते कुछ हफ्तों में इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे निवेशकों के मन में सवाल उठने लगे हैं, क्या यह तेजी थमी है या फिर यह एक अस्थायी ब्रेक है?
किन कारणों से भागा था सोना ?
रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका की आर्थिक अनिश्चितता, मध्य-पूर्व में तनाव, और सेंट्रल बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीद ने पिछले कुछ सालों में गोल्ड की मांग को उछाल दिया। जब बाजारों में डर और अनिश्चितता होती है, तो निवेशक ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं — और यही वजह रही कि इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिली।
अब क्यों थम गई रफ्तार ?
हाल में अमेरिका में टैरिफ को लेकर चिंता कम हुई है और इजरायल-ईरान संघर्ष सिर्फ 12 दिन में सुलझ गया। इसके चलते बाजार में डर घटा और सोने में मुनाफावसूली शुरू हो गई। जब यह 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार गया, तो निवेशकों ने मुनाफा काटना शुरू किया और अब यह घटकर करीब 96,180 रुपये पर आ चुका है।
क्या यह अस्थायी गिरावट है ?
मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, दुनिया भर के 43% सेंट्रल बैंक अगले एक साल में और अधिक सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। यानी लंबी अवधि में डिमांड बरकरार रहने की पूरी संभावना है।
ब्याज दरों में कटौती से मिलेगा नया बल :
जैसे ही अमेरिका में सितंबर 2025 से ब्याज दरों में कटौती शुरू होगी, सोने को फिर से फायदा मिल सकता है। अनुमान है कि 2026 तक 200-300 बेसिस पॉइंट की कटौती हो सकती है। ब्याज दर घटने पर निवेशक अक्सर सोने जैसे गैर-ब्याज उत्पादों की ओर आकर्षित होते हैं।
डॉलर की कमजोरी भी बढ़ा सकती है सोने की चमक :
डॉलर इंडेक्स अभी 100 के नीचे है, यानी डॉलर कमजोर है। ऐसे समय में निवेशक डॉलर से हटकर सोने की ओर बढ़ते हैं। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि अगर ये रुझान जारी रहे, तो 2026 तक गोल्ड की कीमत 4000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
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निवेशकों के लिए सलाह: 'स्मार्ट बायिंग' का समय :
अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं, तो यह गिरावट आपके लिए धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का मौका हो सकती है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अपने पोर्टफोलियो का सिर्फ 5-10 फीसदी हिस्सा ही गोल्ड में निवेश करें। सोना भले ही ऊंचाई पर हो, लेकिन अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव इसे 'सुरक्षित निवेश' बनाए रखते हैं। सोने की कीमतों में फिलहाल गिरावट ज़रूर आई है, लेकिन इसकी चमक पूरी तरह फीकी नहीं पड़ी। अनिश्चित हालात और वैश्विक उथल-पुथल को देखते हुए सोना आने वाले वर्षों में फिर से ऊंचाई छू सकता है। समझदारी यही है कि निवेशक बाजार की चाल पर नजर रखें और गोल्ड को ‘धीरे-धीरे’ और रणनीतिक रूप से अपने पोर्टफोलियो में शामिल करें।

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