रूस के हथियार ध्वस्त, भारत में चिंता; क्या S-400 भी खतरे में..
रूस की सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली एयर डिफेंस प्रणाली S-400 को लेकर यूक्रेन के हालिया दावों ने भारत समेत उन सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है जिन्होंने यह सिस्टम रूस से खरीदा है। यूक्रेन की खुफिया एजेंसी एचयूआर (HUR) ने दावा किया है कि उसके आत्मघाती ड्रोन हमलों में रूस के कब्जे वाले क्रीमिया क्षेत्र में S-400 सिस्टम के अहम घटकों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया है।
HUR के अनुसार, इन हमलों में दो 91N6E ‘बिग बर्ड’ रडार, दो 92N2E मल्टीफंक्शनल डिटेक्शन रडार, और S-400 लॉन्चर तबाह कर दिए गए। टेलीग्राम पर साझा किए गए वीडियो फुटेज में हमले की पुष्टि होती दिख रही है। HUR ने बताया कि यह ऑपरेशन क्रीमिया में रूस की सैन्य मौजूदगी को कमजोर करने के मकसद से किया गया था।

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S-400 की रीढ़ माने जाते हैं ये रडार :
91N6E रडार, जिसे “बिग बर्ड” कहा जाता है, S-400 सिस्टम की रीढ़ होता है। यह बैलिस्टिक मिसाइलों, स्टेल्थ विमानों और अन्य हवाई खतरों का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। HUR का कहना है कि रडार सिस्टम की आंखें होते हैं – इनके बिना पूरा एयर डिफेंस सिस्टम “अंधा” हो जाता है।
इस हमले ने S-400 की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उन देशों के लिए जो इसे अपनी हवाई सुरक्षा का आधार मानते हैं – भारत उनमें प्रमुख है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता ?
भारत ने 2018 में रूस से ₹40,000 करोड़ के समझौते के तहत S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद की थी। अब तक भारत को तीन स्कवाड्रन मिल चुके हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन से सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। बाकी दो स्कवाड्रन की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण विलंबित हो गई थी।
हाल ही में 26-27 जून को चीन के किंगदाओ में आयोजित SCO सम्मेलन के दौरान भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोसोव के बीच मुलाकात हुई। इस बैठक में S-400 की सप्लाई, SU-30 MKI के अपग्रेडेशन और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद पर चर्चा हुई।
भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार, रूस ने भारत को 2026 और 2027 तक दो और स्कवाड्रन देने का आश्वासन दिया है। इसके बाद भारत के पास कुल पांच S-400 सिस्टम होंगे।
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ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी S-400 की ताकत :
भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तान की ओर से संभावित हवाई हमलों को सफलतापूर्वक रोका था। लेकिन यूक्रेन के ताजा हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर ड्रोन जैसे छोटे लेकिन सटीक हथियार इन सिस्टम्स को भेद सकते हैं, तो भविष्य की रणनीति में क्या बदलाव ज़रूरी हैं।
S-400 जैसे हाई-एंड एयर डिफेंस सिस्टम पर यूक्रेनी हमले ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है – क्या अत्याधुनिक तकनीक वाले पारंपरिक रक्षा कवच ड्रोन युद्धों के सामने टिक पाएंगे? भारत के लिए यह वक्त है अपनी रणनीतियों और सुरक्षा ढांचे की नए सिरे से समीक्षा करने का।
Editorial

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