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इजरायल का अल्टीमेटम; यूरेनियम वापस करो या नतीजे भुगतो!
By EditorialPublished on
इजरायल के विदेश मंत्री काट्ज ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि ईरान पर किए गए ताज़ा हमलों का मकसद उसकी परमाणु ताकत को कमजोर करना था। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को खतरनाक स्तर तक संवर्धित (एनरिच) यूरेनियम को तत्काल सौंपना होगा। ये वही यूरेनियम है जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जाता है।
काट्ज ने बताया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान को संयुक्त रूप से यह संदेश भेजा गया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाए। उनका कहना है कि हाल ही में इजरायल की ओर से किए गए हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना था।
परमाणु बम से फिलहाल दूर है ईरान, पर खतरा अभी बाकी :
काट्ज ने दावा किया कि इजरायली हमलों ने ईरान की यूरेनियम ट्रांसफर फैसिलिटी को तबाह कर दिया है, जिससे अब वह संवर्धित यूरेनियम को हथियारों के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इजरायल को यह नहीं पता कि ईरान ने अपना पूरा यूरेनियम भंडार कहां छिपा रखा है, जिससे यह चिंता और गहराती जा रही है कि कहीं ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
408 किलो हाई-ग्रेड यूरेनियम का रहस्य :
'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के पास अब भी करीब 408 किलोग्राम उच्च-श्रेणी का यूरेनियम मौजूद है। ट्रकों की संदिग्ध गतिविधियों के कारण आशंका है कि अमेरिकी हमलों से पहले ही ईरान ने फोर्डो के पास से यूरेनियम हटा लिया था।
खामेनेई को मारने की थी तैयारी :
इजरायल के रक्षा मंत्री ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है — हालिया संघर्ष के दौरान इजरायली सेना की योजना ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को मारने की थी। हालांकि, काट्ज ने यह भी बताया कि जैसे ही खामेनेई सुरक्षित बंकर में चले गए, उन तक पहुँचना मुश्किल हो गया और यह योजना अधूरी रह गई।
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'अमेरिका की इजाज़त नहीं चाहिए' – काट्ज :
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस तरह की कार्रवाई के लिए अमेरिका की मंजूरी ली गई थी, तो उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे फैसलों में इजरायल को किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होती।

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