साहसिक बदलाव: सु‑30 जेट टायरों ने रथ को दिया नया रूप!
हर साल भव्यता और भक्ति के साथ मनाई जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इस बार कोलकाता में एक नई तकनीकी और सांस्कृतिक झलक लेकर आ रही है। 1972 से लगातार ISKCON कोलकाता द्वारा आयोजित की जा रही यह यात्रा इस बार 27 जुलाई 2025 को संपन्न होगी, जिसमें हजारों भक्त रथ को खींचने के लिए जुटेंगे।
लेकिन इस बार की रथ यात्रा को खास बना रहा है एक ऐसा परिवर्तन, जो भक्तों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा – भगवान जगन्नाथ का रथ अब भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सुखोई फाइटर जेट के टायरों पर चलेगा।
पहले बोइंग, अब सुखोई :
अब तक इस रथ में Boeing 747 विमान के पुराने टायरों का उपयोग होता रहा था, जो कोलकाता एयरपोर्ट से प्राप्त किए गए थे। ISKCON इन टायरों का उपयोग बीते 48 वर्षों से करता आ रहा था। लेकिन पिछले साल रथ यात्रा के दौरान तकनीकी दिक्कतों के कारण टायरों में समस्या आई, जिससे इस बार नई और मजबूत टायरों की आवश्यकता पड़ी।
इसी को देखते हुए, इस बार रथ में इस्तेमाल होंगे सुखोई फाइटर जेट के टायर, जो भारतीय वायुसेना के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में से एक है।
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MRF कंपनी ने दिया विशेष सहयोग :
इन टायरों की व्यवस्था प्रसिद्ध टायर निर्माता कंपनी MRF ने की है। ISKCON के उपाध्यक्ष ने स्वयं MRF से संपर्क कर विशेष रूप से सुखोई टायरों की मांग की थी। शुरुआत में यह अनुरोध असामान्य लगा, लेकिन जब MRF के अधिकारियों को इसके पीछे की भावना और तकनीकी ज़रूरत समझ में आई, तो उन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। MRF की टीम ने पहले पुराने टायरों की जांच की और फिर चार नए सुखोई टायर देने की अनुमति दी।
कितनी है टायर की कीमत और क्षमता ?
प्रत्येक सुखोई टायर की कीमत लगभग ₹1.72 लाख है। ये टायर 16 टन तक का भार उठाने में सक्षम हैं, जो रथ यात्रा जैसे विशाल आयोजन के लिए आदर्श हैं। 31 मई को इन टायरों का प्रथम परीक्षण भी किया गया, जिसमें रथ को 24 किलोमीटर तक कोलकाता की सड़कों पर चलाया गया ताकि फिटिंग और परफॉर्मेंस की पुष्टि की जा सके।
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ब्रिगेड परेड ग्राउंड में लगेगा भव्य मेला :
रथ यात्रा के अंत में, रथ ब्रिगेड परेड ग्राउंड तक पहुंचेगा, जहां हर साल की तरह भव्य मेला भी लगेगा। यहां भक्ति, संस्कृति और समाजसेवा का संगम देखने को मिलेगा।
इस बार कोलकाता की रथ यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक तकनीकी अद्भुतता का प्रतीक भी बनेगी। सुखोई टायरों से सुसज्जित रथ न केवल भगवान जगन्नाथ की शोभा बढ़ाएगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि आस्था और नवाचार जब साथ आते हैं, तो परंपरा भी भविष्य की दिशा में आगे बढ़ती है।
Editorial

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