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अंतरिक्ष की विरासत; शुभांशु शुक्ला बोले “बच्चों जैसा चलना..
By EditorialPublished on
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने जैसे ही अंतरिक्ष की सीमा को पार किया, उन्होंने ज़मीन पर मौजूद लोगों से एक भावुक और ऐतिहासिक पल साझा किया। उन्होंने अंतरिक्ष से लाइव वीडियो कॉल के ज़रिए सभी को नमस्कार कहा और अपने अनुभवों को साझा किया। शून्य गुरुत्वाकर्षण के बीच तैरते हुए शुभांशु ने बताया कि वह खुद को एक बच्चे जैसा महसूस कर रहे हैं, जिसे फिर से चलना सीखना होगा। उनका यह पल सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय भावना और जिज्ञासा का प्रतीक बन गया।

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भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रचते हुए Axiom-4 स्पेस मिशन के तहत अंतरिक्ष की ओर सफल उड़ान भरी और वहां पहुंचते ही एक भावुक वीडियो कॉल के ज़रिए देशवासियों को संबोधित किया। अंतरिक्ष से भारत को नमस्कार करते हुए शुभांशु ने अपने अनुभव साझा किए और कहा, “मैं अब जीरो ग्रैविटी की आदत डाल रहा हूं... जैसे कोई बच्चा चलना सीख रहा हो। यह पल वाकई रोमांचक है।”
41 साल बाद भारत से फिर एक अंतरिक्ष यात्री :
1984 में राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान के बाद शुभांशु शुक्ला दूसरे भारतीय हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की है। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम और आगामी गगनयान मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। शुभांशु ने तिरंगे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह उन्हें लगातार याद दिला रहा है कि पूरा देश उनके साथ है।
नासा से Axiom-4 मिशन पर रवाना :
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला ने गुरुवार को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। यह लॉन्च भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए किया गया। इस उड़ान में शुभांशु के साथ अमेरिका की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विज्निएव्स्की और हंगरी के टिबोर कपू शामिल हैं। ये सभी मिलकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर बढ़ रहे हैं।
“यह सिर्फ मेरी नहीं, हम सबकी यात्रा है” :
अंतरिक्ष से एक अन्य संदेश में शुभांशु ने कहा, “नमस्ते, मेरे प्यारे देशवासियों। क्या सफर है! 41 साल बाद हम फिर से अंतरिक्ष में हैं। यह केवल मेरी नहीं, पूरे भारत की यात्रा है। मैं तिरंगा लेकर आया हूं, ताकि हर भारतीय को इस मिशन का हिस्सा महसूस हो।”
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भारत के लिए गौरव का क्षण :
शुक्ला की यह यात्रा भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है, क्योंकि यह आने वाले वर्षों में गगनयान जैसी अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। Axiom-4 मिशन में भारतीय उपस्थिति ने यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में एक अहम भागीदार बनता जा रहा है।
शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बड़ी है, बल्कि यह हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। अंतरिक्ष से तिरंगे को लहराते देखना, और ‘नमस्ते’ की गूंज को वहां तक पहुंचाना—यह एक ऐसा पल है जिसे भारत लंबे समय तक याद रखेगा।

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