पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की ‘पानी या जंग’ वाली धमकी पर भारत ने बेहद सधी हुई लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी है। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जवाब देते हुए कहा कि बिलावल को अगर अपनी राजनीति करनी है तो वो जो कहना है, कहते रहें, लेकिन भारत ऐसे बयानों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत जल संधि के सभी प्रावधानों का पालन कर रहा है और इस तरह की गीदड़भभकियों का कोई असर नहीं होता।


बिलावल की गीदड़भभकी पर भारत का करारा जवाब..
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) प्रमुख और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की गीदड़भभकियों को भारत ने एक ही लाइन में सधा हुआ लेकिन तीखा जवाब दिया है। भारत के जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बिलावल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा, “पानी कहीं नहीं जाएगा, जो कहना है कहते रहो।”
क्या है मामला ?
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ पांच बड़े फैसले लिए थे। इन फैसलों में सबसे बड़ा और पाकिस्तान को सबसे ज्यादा परेशान करने वाला निर्णय था – सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना। भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और बिलावल भुट्टो जरदारी लगातार तीखे और आक्रामक बयान दे रहे हैं।
बिलावल की धमकी: "सभी छह नदियों पर कब्जा करेंगे" :
ताजा बयान में बिलावल भुट्टो ने कहा, "अगर भारत सिंधु जल संधि का सम्मान नहीं करता, तो पाकिस्तान सभी छह नदियों का पानी लेगा। भारत को या तो सिंधु जल बहाल करना होगा या युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।" इससे पहले भी बिलावल ने कहा था, "अगर पानी नहीं बहेगा तो खून बहेगा।"
भारत की प्रतिक्रिया: संयम लेकिन स्पष्टता
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा, "बिलावल को अपनी राजनीति करनी है, तो वो कहते रहें। भारत उनकी गीदड़भभकियों से डरने वाला नहीं है। समय पर जवाब दिया जाएगा, लेकिन अभी इतना ही कहूंगा कि पानी कहीं नहीं जाएगा।"
सीआर पाटिल ने यह भी दोहराया कि भारत संधि के सभी नियमों का पालन कर रहा है और पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की बयानबाज़ी का कोई मतलब नहीं है।
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अमित शाह ने पहले ही किया था ऐलान :
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी साफ कहा था कि सिंधु जल समझौते को कभी बहाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि पाकिस्तान को अपने हर कदम का अंजाम भुगतना होगा।
बिलावल भुट्टो जरदारी की 'जंग' और 'पानी' की धमकियों के बीच भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो दबाव में आएगा और न ही किसी भी तरह की उकसाने वाली राजनीति से प्रभावित होगा। सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे पर भारत की रणनीति अब केवल जवाबी नहीं, निर्णायक होती दिख रही है। और बिलावल जैसे बयानों पर एक ही पंक्ति काफी है – “पानी कहीं नहीं जाएगा, जो कहना है कहते रहो।”
Editorial

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