बस्सी (प्रात:काल संवाददाता)।
राजस्थान के बस्सी उपखंड अंतर्गत साड़ास थाना क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन और की भूमिका को लेकर विवाद गरमा गया है। स्थानीय निवासी राधेश्याम जाट ने दो कांस्टेबलों पर न केवल मारपीट करने, बल्कि अवैध वसूली और धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है, वहीं पुलिस का दावा है कि यह सब बजरी माफिया द्वारा बदनाम करने की साजिश है।


पीड़ित का गंभीर आरोप

राधेश्याम जाट ने बताया कि 22 जून को वह अपने ट्रैक्टर में डीजल भरवाकर खेत के उपयोग के लिए खाद के बैग लेने जा रहा था। रास्ते में दो कांस्टेबल — माखनलाल मीणा और अमीन मीणा — अलग-अलग मोटरसाइकिलों पर आए और ट्रैक्टर को रोकने का इशारा किया। जब राधेश्याम ने ट्रैक्टर रोका और नीचे उतरा, तो दोनों कांस्टेबलों ने उसे कथित रूप से बिना किसी कारण थप्पड़ मारे और उसकी जेब से 2300 रुपए निकाल लिए। इसके बाद धमकी देते हुए दोनों वहां से चले गए।

राधेश्याम के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं थी। उसने दावा किया कि जब वह बजरी ढोने का काम करता था, तब भी ये दोनों कांस्टेबल नियमित रूप से अवैध वसूली किया करते थे। अब उसने बजरी का काम बंद कर दिया है, फिर भी दोनों पुलिसकर्मी उसे बार-बार पैसे देने के लिए मजबूर कर रहे हैं। पैसे नहीं देने पर धमकाया जाता है, और अब तो मारपीट तक की नौबत आ चुकी है।

परिवार को बताई आपबीती, एसपी कार्यालय पहुंचा

घटना के बाद राधेश्याम भयभीत हो गया और सीधे अपने घर पहुंचा। परिजनों को जब पूरी घटना बताई गई, तो वे भी स्तब्ध रह गए। इसके बाद राधेश्याम परिजन के साथ मिलकर सीधे एसपी कार्यालय पहुंचा, जहां उसने अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। राधेश्याम ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों कांस्टेबल खुद को “सूचना अधिकारी” बताते हैं और कहते हैं कि उनका सीधा संपर्क एसपी से है, इसलिए किसी भी शिकायत का कोई असर नहीं होगा।

राधेश्याम का कहना है कि वह अब न्याय की उम्मीद में वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचा है, ताकि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।


पुलिस की प्रतिक्रिया – आरोप झूठे और दबाव बनाने की कोशिश

इस पूरे मामले पर जब स्थानीय थाना प्रभारी आज़ाद पटेल से बात की गई, तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि राधेश्याम पहले बजरी का अवैध परिवहन करता था और अब पुलिस की सख्ती से परेशान होकर उल्टा पुलिस पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।

थानाप्रभारी पटेल ने कहा, “हम बजरी के अवैध कारोबार पर लगातार कार्यवाही कर रहे हैं। इसी वजह से कुछ लोग पुलिस पर झूठे आरोप लगाकर हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि किसी के साथ वाकई अन्याय हुआ होता, तो वह पहले थाने या सीओ ऑफिस में शिकायत करता। अब सीधे एसपी ऑफिस और सोशल मीडिया पर जाकर आरोप लगाना सिर्फ एक हथकंडा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वास्तविक मामले में कानूनी जांच होती है और उचित मंचों के माध्यम से समाधान संभव है। यदि आरोपी कांस्टेबलों ने वास्तव में कुछ गलत किया है, तो उसकी जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी, लेकिन बिना ठोस प्रमाणों के लगाए गए आरोपों का कोई औचित्य नहीं है।


क्या यह बजरी माफिया का पलटवार है?

राजस्थान में बजरी का अवैध खनन लंबे समय से कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन द्वारा इस पर सख्ती करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसके खिलाफ अक्सर पुलिसकर्मियों पर वसूली, मिलीभगत या प्रताड़ना के आरोप लगते रहते हैं। इस मामले में भी पीड़ित का पूर्व में बजरी परिवहन से जुड़ा होना संदेह को गहरा करता है। वहीं, पुलिस यह तर्क दे रही है कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोग अब पुलिस को उलझाने और डराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कार्रवाई न हो सके।


प्रशासन की चुप्पी और जांच की आवश्यकता

इस तरह के गंभीर आरोप यदि सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं, तो केवल थाना स्तर पर खारिज करना उचित नहीं कहा जा सकता। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि इस मामले में निष्पक्ष जांच करवाई जाए, ताकि न केवल दोषियों को सजा मिले, बल्कि अगर कोई निर्दोष पुलिसकर्मी है, तो उसकी छवि भी साफ हो सके। राधेश्याम जैसे पीड़ित को न्याय मिलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस का मनोबल झूठे आरोपों से न गिरे।


यह मामला पुलिस-पब्लिक संबंधों के बीच भरोसे की दीवार को दर्शाता है। अगर वाकई कांस्टेबलों ने अवैध वसूली और मारपीट की है, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए। वहीं अगर यह साजिशन पुलिस को बदनाम करने की साजिश है, तो इसके पीछे के लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस और जनता के बीच पारदर्शिता और संवाद आवश्यक है — ताकि कानून का शासन बना रहे और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर न हो, चाहे वह पुलिस वाला हो या आम नागरिक।

Editorial

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