शुभांशु की अंतरिक्ष डायरी; हर दिन का क्या है मिशन ?
भारत के लिए गर्व का क्षण! भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री आज दोपहर 12:01 बजे (IST) Axiom-4 मिशन के तहत नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष की ओर रवाना हुए। इस मिशन का उद्देश्य उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचाना है, जहां वे अगले दो हफ्ते तक वैज्ञानिक शोध और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे।
कौन हैं इस मिशन के यात्री ?
Axiom-4 मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों में भारत के शुभांशु शुक्ला के साथ अमेरिका की एन मैक्लेन, निकोल आयर्स, और पेगी व्हिटसन शामिल हैं। यह चारों यात्री लो-अर्थ ऑर्बिट में जाएंगे और ISS के हार्मनी मॉड्यूल के स्पेस फेसिंग पोर्ट पर डॉकिंग करेंगे।डॉकिंग की उम्मीद 26 जून को शाम 4:30 बजे (IST) के करीब है, यानी लॉन्च से लेकर डॉकिंग तक 28.5 से 29 घंटे की यात्रा होगी।
लॉन्च की रोमांचक शुरुआत :
मिशन की शुरुआत नासा के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से हुई वही ऐतिहासिक स्थल जहां से नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद की ओर उड़ान भरी थी। चारों अंतरिक्ष यात्री स्पेशल स्पेस सूट पहनकर लॉन्च पैड पर पहुंचे और ड्रैगन कैप्सूल C213 में सवार हुए।
लॉन्च से 35 मिनट पहले लॉन्च डायरेक्टर ने Falcon-9 रॉकेट में ईंधन भरने की अनुमति दी। इसमें सुपरकूल्ड लिक्विड ऑक्सीजन और RP-1 केरोसिन का उपयोग किया गया। साथ ही, किसी आपात स्थिति के लिए इमरजेंसी एस्केप सिस्टम को भी एक्टिव किया गया।
रफ्तार और विज्ञान का मेल :
Falcon-9 रॉकेट ने तय समय पर उड़ान भरी। लॉन्च के 57वें सेकंड पर 'Max Q' का वह क्षण आया जब यान पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। जैसे-जैसे रॉकेट ऊँचाई की ओर बढ़ा, क्रू को गुरुत्वाकर्षण बल (G-Force) का तीव्र असर महसूस हुआ। यान अब लगभग 27,000 किमी/घंटा की गति से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, हर 90 मिनट में एक चक्कर।
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दो हफ्तों तक होंगे अंतरिक्ष में :
Axiom-4 क्रू अब ISS पर दो सप्ताह तक रहकर वैज्ञानिक प्रयोग, खासकर डायबिटीज, बायोलॉजी और माइक्रो ग्रैविटी से जुड़े अध्ययन करेंगे। शुभांशु शुक्ला भी वहां भारतीय संस्कृति को प्रतिनिधित्व देते हुए योग और एजुकेशनल सेशन्स का संचालन करेंगे।
राष्ट्र की शुभकामनाएं :
भारत समेत पूरी दुनिया इस मिशन को लेकर उत्साहित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभांशु और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं और कहा कि "शुभांशु में 1.4 अरब भारतीयों की उम्मीदें और आकांक्षाएं समाई हैं।" Axiom-4 न केवल तकनीकी दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कदमों का प्रमाण भी है। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा देश के युवाओं और वैज्ञानिकों को प्रेरणा देने वाली है।
Editorial

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