सीजफायर विवाद पर NATO चीफ ने ट्रंप को दिया सख्त संदेश!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। नीदरलैंड के द हेग शहर में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे ट्रंप ने अपने हालिया बयान पर सफाई देते हुए ईरान और इजरायल के बीच की लड़ाई की तुलना "स्कूल में लड़ने वाले बच्चों" से कर दी। ट्रंप के इस बयान पर जहां कुछ नेता मुस्कुराते नजर आए, वहीं कूटनीतिक हलकों में इसे गंभीर टिप्पणी माना जा रहा है।

ट्रंप की सफाई: "कभी-कभी सख्त भाषा ज़रूरी"
NATO बैठक में ट्रंप ने कहा: "इजरायल और ईरान अब एक-दूसरे से नहीं लड़ेंगे क्योंकि वे पहले ही लड़ चुके हैं। दोनों वैसे ही लड़ते हैं जैसे दो बच्चे स्कूल में लड़ते हैं। उन्हें कुछ समय लड़ने दीजिए, फिर उन्हें रोकना आसान होता है।" उन्होंने यह भी कहा कि "कभी-कभी सख्त भाषा का इस्तेमाल करना पड़ता है", ताकि दोनों पक्षों को यह एहसास हो कि उन्हें ज़िम्मेदारी से काम लेना होगा।
NATO प्रमुख की चुटकी :
ट्रंप की टिप्पणी पर NATO महासचिव मार्क रुटे ने हंसते हुए कहा, "'लड़ाई के बाद डैडी को डांटना भी पड़ता है।'" इस पर सभा में हल्की मुस्कान जरूर आई, लेकिन ट्रंप का यह बयान दुनियाभर के मीडिया में सुर्खियों में आ गया।
सीजफायर उल्लंघन पर ट्रंप की नाराज़गी :
इससे पहले मंगलवार को वाशिंगटन में ट्रंप ने ईरान और इजरायल दोनों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सीजफायर उल्लंघन पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा: “हमने समझौता किया और ठीक उसके बाद इजरायल ने सबसे बड़ा हमला कर दिया। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। मैं ईरान से भी खुश नहीं हूं। उन्हें 12 घंटे दिए थे, लेकिन एक घंटे में ही सब खत्म हो गया। यह कोई तरीका नहीं है।”
ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों को अब समझ नहीं आ रहा कि वे क्या कर रहे हैं, क्योंकि यह लड़ाई इतनी पुरानी हो चुकी है कि दोनों पक्ष थक चुके हैं लेकिन रुकने को तैयार नहीं हैं।
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया :
हालांकि NATO शिखर सम्मेलन में ट्रंप के बयान को राजनयिक हास्य के रूप में कुछ नेताओं ने लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति का इस तरह से गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को हल्के अंदाज में लेना कूटनीति की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव पूरी दुनिया की कूटनीतिक और सैन्य रणनीति पर पड़ता है। ईरान-इजरायल जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनके "स्कूल के बच्चों जैसी लड़ाई" वाले बयान ने एक बार फिर दिखा दिया है कि ट्रंप अपनी सीधी और बेबाक भाषा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शांति और विवाद दोनों पैदा कर सकते हैं।
Editorial

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