नेशनल कॉन्फ्रेंस से मोहभंग; कांग्रेस का बड़ा झुकाव
जम्मू-कश्मीर की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। जहां एक ओर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच गठबंधन कायम है, वहीं कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रभारी और राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन के ताज़ा बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
नासिर हुसैन ने बुधवार को श्रीनगर में एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि “जब पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में होगी, तभी हम बीजेपी को टक्कर दे सकेंगे।”
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क्या बोले नासिर हुसैन ?
“ये पार्टी का कार्यक्रम है। हमने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि पार्टी को मजबूत करें। गठबंधन हो या न हो, हमें अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत करना है। जब भी चुनाव होंगे, कांग्रेस का आलाकमान तय करेगा कि गठबंधन किया जाए या नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर, दोनों के लिए समान रणनीति तैयार की जा रही है। “जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो चुका है, नतीजे आ चुके हैं, सरकार बन गई है। अब हम आगे की रणनीति बना रहे हैं ताकि दोनों क्षेत्रों में संगठन को मजबूती दी जा सके।”
उमर अब्दुल्ला के बयान पर क्या मायने ?
नासिर हुसैन का यह बयान ऐसे समय आया है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा था कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करने के बाद विधानसभा को भंग कर नए चुनाव कराए जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इस पृष्ठभूमि में नासिर का “पार्टी को अकेले खड़ा करना ज़रूरी है” वाला बयान गठबंधन की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल खड़े करता है।
पहलगाम हमले पर भी उठाए सवाल :
पार्टी की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को स्पष्ट करते हुए नासिर हुसैन ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले पर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा: “यह हमला इंटेलिजेंस फेलियर का नतीजा था। वहां CRPF, पुलिस और आर्मी की मौजूदगी नहीं थी। जब सीमा पार से आतंकी आकर 26 लोगों को मार जाते हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं तो और क्या है?” उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री खुद इस विफलता को स्वीकार कर चुके हैं।
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नासिर हुसैन के इन बयानों से साफ है कि कांग्रेस अब जम्मू-कश्मीर में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने और संभावित रूप से अकेले चुनाव लड़ने की दिशा में सोच रही है। हालांकि गठबंधन पर अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा, लेकिन यह तय है कि कांग्रेस अब सिर्फ सहारा बनकर नहीं, सशक्त विकल्प बनकर सामने आना चाहती है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प मोड़ आने की संभावना है।
Editorial

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