मंसूरी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन 2 नवंबर को...
मंसूरी समाज ने एक बार फिर सामाजिक एकजुटता, परंपराओं के संरक्षण और व्यावहारिक बदलाव की मिसाल पेश की है। आगामी 2 नवंबर को उदयपुर की मंसूरी एज्युकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में कपासन स्थित प्रख्यात सूफी संत हजरत दीवानाशाह बाबा की दरगाह शरीफ पर एक सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मंसूरी समाज के उत्थान, सामाजिक सुधार और सामूहिक सहभागिता की भावना को भी दर्शाता है।
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कपासन (प्रात:काल संवाददाता)।
मंसूरी समाज ने एक बार फिर सामाजिक एकजुटता, परंपराओं के संरक्षण और व्यावहारिक बदलाव की मिसाल पेश की है। आगामी 2 नवंबर को उदयपुर की मंसूरी एज्युकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में कपासन स्थित प्रख्यात सूफी संत हजरत दीवानाशाह बाबा की दरगाह शरीफ पर एक सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मंसूरी समाज के उत्थान, सामाजिक सुधार और सामूहिक सहभागिता की भावना को भी दर्शाता है।
बैठक में समाज के वरिष्ठजनों की सहभागिता
इस आयोजन को लेकर रविवार को दरगाह शरीफ परिसर स्थित मीटिंग हॉल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता सदर अब्दुल लतीफ ने की, जबकि हाजी आज़ाद हुसैन मंसूरी सांवलियाजी ने सरपरस्ती निभाई। बैठक की शुरुआत पवित्र क़ुरान शरीफ़ की तिलावत से हुई।
बैठक में मंसूरी समाज के कई जिलों से आए गणमान्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया और समाज के विकास, शिक्षा, रोजगार और सामूहिक विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
मंसूरी समाज के विकास की दिशा में सुझाव
बैठक में बोलते हुए अब्दुर्रहीम मंसूरी (राजसमंद), एडवोकेट राशिदुल गफूर, मास्टर गुलाम जिलानी (चित्तौड़गढ़), शौकत अली (रेलमंगरा), मोहम्मद हुसैन मंसूरी (धरियावद), अल्लादीन मंसूरी (कुंवारिया), मोहम्मद अली मंसूरी (शाहपुरा, भीलवाड़ा) और मोहम्मद अनीस मंसूरी (बेंगू) ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।
इन सभी वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर बल दिया कि समाज को वर्तमान समय की चुनौतियों को समझते हुए एकजुट रहना चाहिए और हुजूर स.अ.व. की सुन्नत पर अमल करते हुए शादी-ब्याह में अनावश्यक खर्च कम करके शिक्षा और रोजगार पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
सामूहिक विवाह सम्मेलन का निर्णय
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 2 नवंबर को दरगाह हज़रत दीवानाशाह बाबा साहब में सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन न केवल विवाह की रस्मों को सरल, सुलभ और सादगीपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह मंसूरी समाज के सामाजिक दायित्व की भी झलक प्रस्तुत करता है।
सामूहिक विवाह सम्मेलन के ज़रिए समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत दी जाएगी और दिखावे व खर्च की मानसिकता को खत्म करने का संदेश दिया जाएगा।
पुरानी उपलब्धियों की प्रस्तुति
इस अवसर पर सोसायटी के कोषाध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ मंसूरी ने 19 जनवरी को अहमद कबीर मंजिल में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह और परिचय सम्मेलन का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने का यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा ताकि युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन मिले और वे समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मंसूरी समाज को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में युवा उचित मार्गदर्शन, संसाधनों और अवसरों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। इसीलिए ज़रूरी है कि मंसूरी समाज के सभी वर्गों तक शिक्षा के महत्व को पहुंचाया जाए और बच्चों को स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक शिक्षा की ओर प्रेरित किया जाए। साथ ही स्वरोजगार, सरकारी योजनाओं की जानकारी और स्किल डेवलपमेंट जैसी पहलों को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई गई।
बैठक में मौजूद प्रमुख लोग
इस अहम बैठक में हाजी असलम गोरी, मोहम्मद युसूफ (निंबाहेड़ा), मास्टर अब्दुल हमीद, जलालुद्दीन मंसूरी, मास्टर उमर मंसूरी (चित्तौड़गढ़), हाजी उस्मान मंसूरी (सदर मंसूरी समाज कांकरोली), आईएम मंसूरी, अख्तर हुसैन (उदयपुर), हमीद खां मंसूरी (खेरोदा), अब्दुल रज्जाक (भोपालसागर) और कपासन के अन्य समाज सदस्य भी उपस्थित रहे। इन सभी ने अपने विचार साझा करते हुए समाज की एकता, शिक्षा, रोज़गार और पारिवारिक मूल्य प्रणाली को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
मंसूरी समाज द्वारा आयोजित यह सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल आर्थिक दृष्टि से सहायक है बल्कि सामाजिक समरसता और एकजुटता का प्रतीक भी है। समाज के वरिष्ठजनों और युवा पीढ़ी के प्रतिनिधियों द्वारा शिक्षा और रोजगार पर बल देना यह दर्शाता है कि मंसूरी समाज समय के साथ आगे बढ़ रहा है और सामाजिक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहा है। यह सम्मेलन निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को एक सकारात्मक दिशा देगा और यह उदाहरण बनेगा कि सादगी और एकता से समाज को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है।

