फारूक अब्दुल्ला की बयानबाजी; J&K से राज्य का दर्जा छीना क्योंकी ..
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा क्यों छीना गया और क्या इसका कारण मुस्लिम बहुल आबादी है? फारूक ने कहा, “क्या हम हिंदुस्तान के दुश्मन हैं? हमने मुल्क के साथ हाथ जोड़ा था, जबकि पाकिस्तान हमारे सामने खड़ा था।”
“अगर देरी हुई तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट”
फारूक अब्दुल्ला ने यह भी चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल नहीं करती, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को अब लंबा इंतजार मंज़ूर नहीं है और यदि अधिकारों की बहाली में और देरी होती है, तो कोर्ट ही एकमात्र विकल्प बचेगा।
मुस्लिम राज्य होने पर छीना गया स्टेटहुड ?
अनंतनाग में एक पत्रकार ने जब फारूक अब्दुल्ला से पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा इसलिए छीना गया क्योंकि यह एक मुस्लिम बहुल राज्य है, तो उन्होंने दोहराया कि “इस पर गंभीर सोच की ज़रूरत है कि हमसे स्टेटहुड क्यों लिया गया? क्या हम कोई गुनहगार थे? हमने तो भारत के साथ हाथ मिलाया था, फिर यह सज़ा क्यों?” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
इजरायल-ईरान सीजफायर पर भी दी प्रतिक्रिया :
फारूक अब्दुल्ला ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इजरायल-ईरान के बीच सीजफायर को "अल्लाह की नेमत" बताया और कहा कि यह एक राहत भरी खबर है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल की नजर अब अरब देशों के तेल और गैस संसाधनों पर है।
उन्होंने कहा, “आज वे सोचते हैं कि ईरान पर हमला हुआ है, लेकिन एक दिन इजरायल उन पर भी हमला करेगा। इजरायल सिर्फ चेहरा है, असली ताकत अमेरिका है जो उसके पीछे खड़ा है।”
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युद्ध का असर होगा वैश्विक :
फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और गहराता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा। उन्होंने इसे वैश्विक संकट का संकेत बताते हुए सभी देशों से संयम बरतने की अपील की।
Editorial

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