cyber-crime
मुंबई। शिवाजी पार्क के एक वरिष्ठ टैक्स कंसल्टेंट एक साइबर ठगी का शिकार हो गए, जिसमें उन्होंने 2.36 करोड़ रूपए खो दिए। ठग खुद को बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण के अधिकारी बताकर शिकायतकर्ता के संपर्क में आए थे।
अमोल (बदला हुआ नाम), एक सेवानिवृत्त पेशेवर, की सात बीमा पॉलिसियां थीं जो प्रीमियम भुगतान चूकने के कारण निष्क्रिय हो गई थीं। अपनी निवेश राशि वापस पाने के लिए प्रयासरत अमोल को कॉल करनेवाले एक शख्स ने अपना परिचय दिनेश चतुर्वेदी के तौर पर देते हुए उन्हें उनकी बीमा की निवेश राशि वापस दिलाने की पेशकश की।
भरोसा जीतने के लिए, ठग ने अमोल से आधार और पैन कार्ड से संबंधित सत्यापन मांगा। सहायता का आश्वासन देते हुए, चतुर्वेदी ने 49,000 की सेवा राशि की मांग भी की। अमोल ने यह राशि ट्रांसफर कर दी, जिसके बाद और जानकारी मांगी गई।
चतुर्वेदी ने अमोल को बताया कि सात पॉलिसियों से करीब 24 लाख रुपए वापस मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए 6 लाख रुपए का टैक्स देना होगा। अमोल ने यह रकम भी दे दी। इसके बाद उन्हें अलग-अलग नंबरों से कॉल आने लगे, जिनमें और अधिक पैसे मांगे गए। यह सोचकर कि 24 लाख रुपए वापस मिलेंगे, अमोल ने अपना बैंक खाता विवरण दे दिया, जिसके बाद आरोपियों ने 2.36 करोड़ रुपए कई खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जब अमोल को पता चला कि वह ठगी के शिकार हो चुके हैं, तो उन्होंने तुरंत सेंट्रल डिविजन साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
Editorial

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