नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ कर कांग्रेस के भीतर हलचल मचा दी है। थरूर ने 'द हिंदू' अखबार के लिए लिखे अपने लेख में न केवल प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली, ऊर्जा और जनसंपर्क क्षमता की प्रशंसा की, बल्कि विदेश नीति पर सरकार के प्रयासों की भी सराहना की।


थरूर द्वारा यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद की खबरें पहले से चल रही हैं। उनकी यह प्रशंसा कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक लाइन से थोड़ी अलग मानी जा रही है, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।


ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर का समर्थन

शशि थरूर ने अपने लेख में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की जमकर सराहना की। उन्होंने लिखा, "भारत की यह तत्काल और निर्णायक सैन्य प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक थी। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह था कि भारत ने उसके बाद जो कूटनीतिक पहल की, उसने वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति को मजबूती प्रदान की।"

थरूर ने इस कूटनीतिक प्रयास के तहत भेजे गए डेलिगेशन का अनुभव साझा किया, जिसमें वह स्वयं भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि गुयाना, पनामा, कोलंबिया, ब्राजील और अमेरिका भेजे गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल में काम करना एक अद्वितीय अनुभव रहा।

"भारत एक स्वर में बोलता है" – थरूर

शशि थरूर ने डेलिगेशन की विशेषता बताते हुए लिखा, "इस प्रतिनिधिमंडल की सबसे खास बात यह थी कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, राज्यों और धर्मों के प्रतिनिधि शामिल थे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद की बात आती है, तो भारत एक स्वर में बोलता है।"

उन्होंने कहा कि डेलिगेशन ने दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की कार्रवाई क्यों जरूरी थी और पाकिस्तान व आतंकवाद के बीच का संबंध किस प्रकार वैश्विक शांति के लिए खतरा है।

थरूर ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे डेलिगेशन की कोशिशों के चलते कोलंबिया ने पाकिस्तान पर दिए गए अपने प्रारंभिक बयान को वापस लिया और भारत का समर्थन किया। उन्होंने इसे "एक अहम कूटनीतिक जीत" बताया।

मोदी की प्रशंसा ने खड़े किए सियासी सवाल

शशि थरूर का लेख तब और विवादास्पद हो गया जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत खूबियों की भी सार्वजनिक रूप से सराहना की। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री की ऊर्जा, गतिशीलता और लोगों से जुड़ने की इच्छा भारत के लिए एक अहम संपत्ति है।"

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की ये विशेषताएं न केवल घरेलू राजनीति में प्रभावी हैं, बल्कि भारत की वैश्विक छवि को भी नई पहचान देती हैं।


हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी के काम की सराहना की हो। इससे पहले भी 2017 में उन्होंने मोदी को "न्यू इंडिया का प्रतीक" बताया था। तब भी कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने उनके बयान से दूरी बना ली थी।

कांग्रेस पार्टी में असहजता?

थरूर के इस लेख को लेकर कांग्रेस में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के भीतर खलबली मच गई है। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस तरह के बयान पार्टी की वैचारिक स्थिति को कमजोर करते हैं, खासकर जब लोकसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शशि थरूर पहले भी पार्टी लाइन से हटकर बयान देते रहे हैं और उनका यह लेख भी उसी कड़ी का हिस्सा है। कुछ नेता यह भी मानते हैं कि थरूर जानबूझकर खुद को एक "स्वतंत्र सोच वाले नेता" के रूप में पेश कर रहे हैं।

शशि थरूर की छवि और भूमिका

शशि थरूर न केवल एक अनुभवी राजनेता हैं, बल्कि वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के विचारक, लेखक और पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी भी हैं। वे अक्सर अपनी स्वतंत्र राय, भाषा की सटीकता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

हाल के वर्षों में, वे कांग्रेस के भीतर एक ऐसी आवाज के रूप में उभरे हैं जो सरकार की आलोचना करने के साथ-साथ उसकी अच्छी नीतियों को स्वीकारने से भी नहीं हिचकती। इससे उन्हें पार्टी के भीतर प्रगतिशील सोच वाले नेता के रूप में भी देखा जाता है, लेकिन आलोचक इसे "लाइन क्रॉस करने" के तौर पर भी देखते हैं।


क्या है राजनीतिक संदेश?

शशि थरूर के इस बयान को केवल एक सामान्य प्रशंसा नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का मानना है कि यह एक सधी हुई राजनीतिक चाल भी हो सकती है। यह बयान उस समय आया है जब सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक कूटनीति को लेकर खुद को मजबूती से पेश कर रही है। थरूर का यह लेख प्रधानमंत्री की छवि को और सशक्त करने का काम कर सकता है, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर।

शशि थरूर का यह लेख एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या वह कांग्रेस के भीतर "अलग राय रखने वाले" नेता के रूप में अपनी छवि और भी मजबूत कर रहे हैं या यह किसी बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। एक बात तो तय है कि शशि थरूर ने फिर से खुद को सुर्खियों में ला दिया है — इस बार एक सरकारी ऑपरेशन की तारीफ कर और प्रधानमंत्री मोदी की सराहना कर।


Editorial

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