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ईरान की धमकी हुई बेअसर; भारत की तेल रणनीति जबरदस्त
By EditorialPublished on
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर दिया जाता है, तो भी भारत की तेल आपूर्ति पर गंभीर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 90 फीसदी तेल आयात करता है और इसका लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से इसी जलडमरूमध्य के ज़रिए आता है, लेकिन रणनीतिक भंडारण और वैकल्पिक आपूर्ति चैन की बदौलत भारत ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार है।

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी संसद ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (हॉर्मुन जलडमरूमध्य) को बंद करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हवाई हमलों के बाद उठाया गया है। इस जलमार्ग के जरिए दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है, और भारत अपने तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से प्राप्त करता है। ऐसे में इसकी संभावित बंदी को लेकर चिंता ज़रूर है, लेकिन भारत पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सरकार ने दी आश्वस्ति, कोई कमी नहीं :
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बयान दिया है कि “क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं है, सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।” भारत प्रतिदिन लगभग 51 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसे रिफाइन करके पेट्रोल और डीज़ल बनाया जाता है।
रूस बना वैकल्पिक स्त्रोत :
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने पहले ही रूस से तेल आयात बढ़ा दिया है। रूस से आयातित तेल सुएज कैनल के रास्ते भारत पहुंचता है, जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा अमेरिका, ब्राजील, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देश भी भारत के लिए वैकल्पिक तेल आपूर्ति स्रोत हैं।
भारत की रणनीति ने टला संकट :
जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, भारत ने सऊदी अरब और इराक जैसे मिडिल ईस्ट के अन्य सप्लायर्स से आयात बढ़ा दिया। साथ ही रणनीतिक तेल भंडारण की सुविधा भी भारत के पास पहले से मौजूद है, जिससे अस्थाई संकट से निपटा जा सकता है।
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कीमतें बढ़ सकती हैं, पर सप्लाई नहीं रुकेगी :
हालांकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, लेकिन भारत में इसकी सीधी आपूर्ति पर असर सीमित रहेगा। सरकार की रणनीति और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की बदौलत स्थिति नियंत्रण में बनी रह सकती है। भले ही हॉर्मुज़ जलमार्ग बंद होने की स्थिति में दुनिया भर में चिंता का माहौल हो, लेकिन भारत ने पहले से ही ऐसे हालात से निपटने की तैयारी कर रखी है। वैकल्पिक रास्तों और स्रोतों के चलते भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है।

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