भीलवाड़ा, 21 जून 2025 - राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर मिले शवों ने पूरे क्षेत्र में सनसनी मचा दी है। शाहपुरा में एक महिला का शव नीम के पेड़ से लटकी अवस्था में मिला है, जबकि आसींद क्षेत्र में छह दिन से लापता युवक का शव जंगल में मिलने से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है और विभिन्न संभावनाओं पर विचार कर रही है।


शाहपुरा में महिला की संदिग्ध आत्महत्या

शाहपुरा थाने के क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जब 24 वर्षीय फूला का शव खेत में नीम के पेड़ से लटकी अवस्था में मिला। शाहपुरा थाने के एएसआई गोपाललाल के अनुसार, मृतका फूला और उसके पति मुकेश कहार के बीच गुरुवार को किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ था। इस झगड़े के अगले दिन ही फूला का शव पेड़ से लटकी अवस्था में मिलना एक रहस्यमय घटना बन गई है।

घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और शव को पेड़ से उतार लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मृतका फूला के भाई मुकेश कहार ने पुलिस के समक्ष एक गंभीर आरोप लगाया।

मुकेश कहार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसकी बहन फूला को संतान न होने के कारण पारिवारिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। उसका आरोप है कि बच्चे न होने की वजह से फूला को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। यह जानकारी इस घटना को एक नया आयाम देती है और सवाल खड़े करती है कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या कुछ और।

फूला और मुकेश कहार का नाता विवाह चार-पांच साल पहले हुआ था। स्थानीय समुदाय में नाता विवाह एक सामाजिक प्रथा है, लेकिन इस मामले में संतान न होने का दबाव एक बड़ी समस्या बन गया था। शाहपुरा थाना प्रभारी और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंचकर विस्तृत छानबीन कर रही है। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है, जो जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


आसींद में युवक की रहस्यमय मौत

दूसरी घटना आसींद थाना सर्किल की है, जहां रघुनाथपुरा के गांव झालरा से कटार के कच्चे सड़क मार्ग के सहारे जंगल में एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान सरेली घाटी निवासी 34 वर्षीय टीकम सिंह, पुत्र हिम्मत सिंह के रूप में हुई है।

इस मामले की सबसे चिंताजनक बात यह है कि टीकम सिंह 15 जून की दोपहर से अपने घर से लापता था। चार दिन बाद 17 जून को परिजनों ने आसींद थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। लेकिन इससे पहले कि पुलिस की तलाश रंग लाती, टीकम सिंह का शव जंगल में मिल गया।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए न केवल थाना प्रभारी बल्कि एएसपी सहाड़ा रोशन पटेल और डीएसपी आसींद ओमप्रकाश सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। उच्च अधिकारियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।

मृतक के परिजनों ने पुलिस के समक्ष एक चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीकम सिंह की हत्या की गई है और यह प्राकृतिक मौत नहीं है। इस आशंका को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मेडिकल बोर्ड को बुलाकर मौके पर ही पोस्टमार्टम करवाया है।


पुलिस की जांच रणनीति

दोनों मामलों में पुलिस अलग-अलग रणनीति अपना रही है। शाहपुरा के मामले में पारिवारिक विवाद और सामाजिक दबाव के कोण से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और कारण है।

आसींद के मामले में हत्या की आशंका को देखते हुए पुलिस सभी संभावित कोणों से जांच कर रही है। टीकम सिंह के दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 15 जून को घर से निकलने के बाद वह कहां गया था और किससे मिला था।

सामाजिक चिंताएं और सुरक्षा

इन दोनों घटनाओं ने स्थानीय समुदाय में गहरी चिंता पैदा की है। शाहपुरा की घटना महिलाओं पर होने वाले सामाजिक दबाव की ओर इशारा करती है, जबकि आसींद की घटना कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि संतान न होने के कारण महिलाओं पर होने वाला दबाव एक गंभीर सामाजिक समस्या है। उनकी मांग है कि इस तरह के मामलों में न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक स्तर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।


आगे की कार्य योजना

पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोनों मामलों की गहन जांच की जाएगी। शाहपुरा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जबकि आसींद के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ-साथ अन्य साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

ये दोनों घटनाएं भीलवाड़ा जिले में सामाजिक और कानूनी चुनौतियों को उजागर करती हैं। पुलिस की जांच के परिणाम का इंतजार पूरा समुदाय कर रहा है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Editorial

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