चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का वार;
लोकसभा चुनाव 2024 भले ही संपन्न हो गए हों, लेकिन चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सियासी टकराव अब भी जारी है। शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग (Election Commission) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जानबूझकर महत्वपूर्ण चुनावी डेटा और सबूत नष्ट कर रहा है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
“जिससे जवाब चाहिए, वही सबूत मिटा रहा है” – राहुल गांधी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “वोटर लिस्ट मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में नहीं दी जा रही, CCTV फुटेज कानून बदलकर छिपा दी गई है, और अब चुनाव की फोटो-वीडियो को एक साल की बजाय 45 दिन में ही नष्ट किया जाएगा।" उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए "ज़हर" करार देते हुए लिखा – “मैच फिक्स है!”
चुनाव आयोग का पलटवार – “गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरि”
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट और तीखी प्रतिक्रिया दी। आयोग ने कहा कि मतदान केंद्रों की CCTV और वेबकास्टिंग फुटेज को सार्वजनिक करना मतदाताओं की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। EC ने चेताया कि इससे यह पता चल सकता है कि किसने वोट दिया और किसने नहीं – जिससे राजनीतिक दबाव, भेदभाव या डराने-धमकाने की स्थिति पैदा हो सकती है।
“कानून के तहत ही काम कर रहा है आयोग”
EC अधिकारियों ने कहा कि आयोग जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 तथा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम करता है। उन्होंने राहुल गांधी की मांगों को संवैधानिक सीमाओं के बाहर बताया और कहा कि चुनाव आयोग की प्राथमिकता चुनाव की निष्पक्षता और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
CCTV फुटेज रखने की समयसीमा – 45 दिन
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि CCTV फुटेज को केवल आंतरिक प्रशासनिक उपयोग के लिए 45 दिन तक रखा जाता है। अगर इस अवधि के भीतर कोई चुनावी याचिका दाखिल होती है, तो फुटेज अदालत को उपलब्ध कराए जाते हैं। अन्यथा, उन्हें नष्ट कर देना नियमानुसार आवश्यक है ताकि गलत जानकारी फैलाने या दुरुपयोग की संभावना न रहे।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
नए नियम और रिकॉर्डिंग के तरीके :
सरकार ने पिछले साल चुनाव आयोग की सिफारिश पर नियमों में संशोधन किया था, जिसके तहत कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। 30 मई को आयोग ने राज्यों को पत्र भेजकर बताया था कि फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, CCTV और वेबकास्टिंग जैसे कई माध्यमों से चुनाव प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग की जाती है – लेकिन ये सब नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से उपयोग में लिए जाते हैं।
राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच इस ताजा टकराव ने चुनाव पारदर्शिता बनाम सुरक्षा की बहस को फिर से हवा दे दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को कितना आगे ले जाता है और आयोग अपनी स्थिति कैसे और स्पष्ट करता है।
Next Story