पाक सांसद का
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली गुरुवार को उस समय चर्चा का केंद्र बन गई जब वहां के सांसद मुजाहिद अली ने अपने भाषण में आईएसआई, जिहाद और गजवा-ए-हिंद जैसे मुद्दों पर न केवल खुलकर बात की, बल्कि एक खतरनाक विचारधारा का भी समर्थन किया। उन्होंने संसद के पटल से भारत, हिंदू, यहूदी और ईसाई समुदाय के खिलाफ जहर उगला, जिसे सुनने के बाद वहां मौजूद सांसदों ने मेजें थपथपा कर उनका समर्थन किया।
मुजाहिद अली ने अपने भाषण की शुरुआत एक भड़काऊ बयान से की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान इस्लामी दुनिया का "हेडक्वार्टर" है और वहां से आने वाली ताकत पूरी दुनिया को बदल सकती है। उन्होंने कहा, "जिस तरह से हमारी वायुसेना ने भारत को जवाब दिया है, वह प्रशंसनीय है। हालांकि भारत ताकत में हमसे कहीं आगे है, लेकिन हमारे पास कलमे की ताकत है, जिसका वजन एटम बम से भी ज्यादा है।"
इस बयान के बाद उन्होंने जो बातें कहीं, वह केवल पाकिस्तान की धार्मिक कट्टरता को उजागर नहीं करतीं, बल्कि यह बताती हैं कि किस तरह वहां की राजनीति, सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक वर्ग 'गजवा-ए-हिंद' जैसे विचारों को खुलकर समर्थन दे रहा है।

गजवा-ए-हिंद और जिहाद का खुला समर्थन :
मुजाहिद अली ने अपने भाषण में धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों को एकजुट होकर गैर-मुस्लिमों के खिलाफ खड़े होना चाहिए। उन्होंने कहा, "गैर-मुसलमानों ने हमेशा मुसलमानों के बीच फूट डालकर राज किया है। हदीस में कहा गया है कि खुरासान से काली पगड़ी वाले लोग उठेंगे और धर्म की रक्षा करेंगे। यहूदियों और ईसाइयों पर जीत हासिल की जाएगी।"
उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि यह समय है जब इस्लामी दुनिया एक हो और गजवा-ए-हिंद को अमल में लाया जाए। उनके मुताबिक, पाकिस्तान इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त केंद्र है।

ISI और सेना की भूमिका पर इशारा :
मुजाहिद अली ने जान-बूझकर या अनजाने में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की भूमिका की भी पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे से कुछ ताकतें इस जिहादी मानसिकता को हवा दे रही हैं। यह एक प्रकार का इशारा था कि पाकिस्तान की सत्ता के केंद्र में बैठे लोग कट्टरपंथ को समर्थन दे रहे हैं।
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संसद में समर्थन, अंतरराष्ट्रीय चिंता :
इस भाषण के दौरान पाकिस्तान की संसद में मौजूद अधिकांश सांसदों ने मुजाहिद अली की बातों पर मेजें थपथपाईं, जिससे साफ हो गया कि यह सोच सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि वहां के राजनीतिक वर्ग में भी गहराई तक फैली हुई है। भारत, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए यह बयान गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। जहां पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद से दूरी की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी संसद में खुलेआम जिहाद और धर्म युद्ध की वकालत हो रही है।
मुजाहिद अली का यह बयान पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करता है – जहां एक ओर वह दुनिया के सामने लोकतंत्र और शांति की बातें करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी संसद में बैठकर सांसद गजवा-ए-हिंद और धार्मिक नरसंहार की बात करते हैं। यह न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि इस्लामी कट्टरता के वैश्विक विस्तार का भी संकेत है।
Editorial

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