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तीन कार्गो प्लेन से चीन की गुप्त खेप; ईरान में नया तूफान
By EditorialPublished on
इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इसी बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है—चीन के तीन कार्गो विमान ट्रांसपोंडर बंद कर चुपचाप ईरान पहुंच गए। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है और यह आशंका तेज हो गई है कि चीन ने इस युद्ध में गुपचुप एंट्री ले ली है। अमेरिका और इजरायल की चिंता अब और बढ़ गई है।

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इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब वैश्विक शक्ल लेता जा रहा है। अब तक अमेरिका और रूस की प्रत्यक्ष प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी थीं, लेकिन अब चीन की गुप्त भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। बीते कुछ दिनों में चीन के तीन कार्गो विमान ट्रांसपोंडर बंद कर सीधे ईरान की एयरस्पेस में दाखिल हुए हैं—वो भी तब, जब ईरान की हवाई सीमा सुरक्षा कारणों से बंद थी। इससे संदेह गहरा गया है कि क्या चीन ने इजरायल-ईरान युद्ध में चुपचाप हस्तक्षेप कर लिया है?
चीन के मिस्ट्री विमानों की गतिविधि से दुनिया में हलचल :
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये तीनों बोइंग 747 विमान शंघाई और अन्य उत्तरी चीनी शहरों से उड़ान भरकर लग्जमबर्ग रूट पर ट्रैक किए जा रहे थे। लेकिन मिड-एयर ही इन विमानों ने अपने ट्रांसपोंडर और अन्य सेंसर बंद कर दिए और ईरान की एयरस्पेस में दाखिल हो गए। FlightRadar24 जैसे वैश्विक एविएशन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, ये विमान कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के ऊपर से उड़ान भरते हुए ईरान की ओर बढ़े लेकिन सीमा के पास रडार से गायब हो गए।
क्या थे इन विमानों में? बढ़ते हैं सवाल :
इन विमानों में क्या लदा हुआ था, इसका अब तक कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। लेकिन ट्रांसपोंडर बंद करने की कार्रवाई आम तौर पर सैन्य या खुफिया उड़ानों से जुड़ी होती है, जिससे आशंका गहरा गई है कि ये विमान हथियार, रक्षा उपकरण या स्पेशल यूनिट्स लेकर ईरान पहुंचे हों। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधि सामान्य नहीं है, खासकर उस समय जब एक देश युद्ध की स्थिति में हो और उसकी एयरस्पेस बंद हो।
चीन-ईरान की पुरानी साझेदारी और रणनीति :
गौरतलब है कि चीन और ईरान के बीच 2021 में एक 25 साल का रणनीतिक समझौता हुआ था। इसके तहत चीन, ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा और बदले में उसे छूट पर तेल और गैस की आपूर्ति मिलेगी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंस साझेदारी और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग तय हुआ था।
हेरिटेज फाउंडेशन के नेशनल डिफेंस सेंटर के डायरेक्टर रॉबर्ट ग्रीनवे के अनुसार,"चीन ईरान से प्रतिबंधित तेल सस्ते दामों पर खरीदता है और बदले में उसे सामरिक, तकनीकी और सैन्य सहयोग देता है। यह सहयोग अब और खुले रूप में सामने आ रहा है।"
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रूस की अमेरिका को चेतावनी :
वहीं, रूस ने भी इस युद्ध को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इस युद्ध में सीधे शामिल होता है, तो रूस और संभवतः चीन भी ईरान का खुलकर समर्थन करेंगे। पुतिन की इस चेतावनी ने पहले से ही तनाव में झुलस रहे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर दिया है।
चीन के इन रहस्यमयी विमानों ने जियोपॉलिटिक्स की चालों को और अधिक पेचीदा बना दिया है। यदि यह पुष्टि होती है कि चीन ने ईरान को हथियार या सैन्य सहायता भेजी है, तो यह युद्ध अब दो देशों की लड़ाई न रहकर एक वैश्विक शक्ति संतुलन की परीक्षा बन जाएगा। सवाल अब यह है, क्या अमेरिका इस गहराते समीकरण में कदम रखेगा, और अगर रखा, तो दुनिया एक और बड़ी जंग की ओर बढ़ जाएगी?

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