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हरिद्वार। पतंजलि के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है जो पार्किंसंस रोगियों के लिए आशा की किरण साबित हो सकती है। उनके अनुसंधान में यह पाया गया है कि आयुर्वेदिक औषधि न्यूरोग्रिट स्वर्ण न केवल पार्किंसंस के कारण होने वाली स्मृति की समस्या को ठीक करती है, बल्कि जीवनकाल भी बढ़ाती है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में सीएनएस न्यूरोसाइंस एंड थेरेप्यूटिक्स में प्रकाशित हुआ है।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि पार्किंसंस की बीमारी में व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है और उसकी सामाजिक गतिविधियां भी सीमित हो जाती हैं। अब हम पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि इस समस्या का समाधान संभव है। न्यूरोग्रिट स्वर्ण हमारी पुरानी आयुर्वेदिक परंपरा और आधुनिक विज्ञान का बेहतरीन मिश्रण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाए तो आज की जटिल बीमारियों का इलाज करने में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। न्यूरोग्रिट स्वर्ण में ज्योतिष्मती, गिलोय जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के साथ एकांगवीर रस, मोती पिष्टी, रजत भस्म और वसंत कुसुमाकर रस जैसे घटक शामिल हैं जो मस्तिष्क विकारों में फायदेमंद माने गए हैं।
पतंजलि अनुसंधान संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ अनुराग वार्ष्णेय ने समझाया कि सूक्ष्म जीव पर यह पहली बार किसी आयुर्वेदिक दवा के साथ प्रयोग किया गया है। इसके परिणाम न सिर्फ विज्ञान की दुनिया के लिए रोमांचक हैं बल्कि भविष्य में मानव स्वास्थ्य पर इसके गहरे प्रभाव हो सकते हैं।
डॉ वार्ष्णेय ने बताया कि डोपामाइन हमारे मस्तिष्क का एक जरूरी रसायन है जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। जब यह ठीक से काम नहीं करता तो शरीर अपना संतुलन खो देता है और मस्तिष्क वे काम भी भूलने लगता है जिन्हें हम आसानी से कर पाते थे। इसी स्थिति को पार्किंसंस कहते हैं।
अनुसंधान में पाया गया कि न्यूरोग्रिट स्वर्ण के सेवन से जीवों में हानिकारक तत्व कम हुए और कुछ महत्वपूर्ण जैविक कारक बढ़े जो पार्किंसंस के कारण घट गए थे। यह खोज पारंपरिक आयुर्वेद की शक्ति को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करती है।
Editorial

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