IAEA की पलटी से मचा बवाल; खामेनेई का फूटा गुस्सा
ईरान और इजरायल के बीच बीते आठ दिनों से लगातार जारी युद्ध ने अब नया मोड़ ले लिया है। जंग की शुरुआत जिस परमाणु हथियार वाली रिपोर्ट से हुई थी, उसी पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रोसी ने अपने पहले दावे से पलटते हुए कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
ग्रोसी का यह बदला हुआ बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और इजरायल एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं। इस युद्ध में अब तक सैकड़ों जानें गई हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह हुआ है और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।
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कैसे भड़की थी जंग ?
युद्ध की शुरुआत IAEA की उस रिपोर्ट से मानी जा रही है, जिसमें एजेंसी ने दावा किया था कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बना रहा है। रिपोर्ट के आधार पर ही इजरायल ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के कई ठिकानों पर हमले किए, जिनमें स्टॉक एक्सचेंज, सैन्य बेस और यहां तक कि एक अस्पताल भी शामिल था। गुरुवार को किए गए ईरानी हमले में कई लोग घायल हुए।
अब ग्रोसी ने बदल दिया बयान :
जिन बयानों और रिपोर्ट्स के चलते जंग की आग भड़की, अब वही एजेंसी बैकफुट पर आ गई है। राफेल ग्रोसी ने ताज़ा प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “हमारे पास अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। सैटेलाइट इमेज और निरीक्षणों में रेडिएशन या नष्ट हुए संयंत्रों के संकेत नहीं मिले हैं।”
ग्रोसी के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या जंग एक गलत आकलन या जानबूझकर फैलाई गई सूचना की वजह से शुरू हुई? और यदि ऐसा है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा?
ईरान ने जताई नाराज़गी :
ग्रोसी के यू-टर्न पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान से जारी बयान में कहा गया: “IAEA का यह बयान अब बहुत देर से आया है। जिस समय सच सामने आना चाहिए था, उस समय एजेंसी की चुप्पी और गलत रिपोर्ट ने हालात बिगाड़ दिए। इजरायल को हमला करने का बहाना मिल गया, और आज हम युद्ध में हैं।”
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ईरान ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि IAEA की रिपोर्ट जानबूझकर ग़लत दिशा में मोड़ी गई ताकि इजरायल को हमला करने का अंतरराष्ट्रीय नैतिक समर्थन मिल सके।
अमेरिका की भूमिका पर नजरें :
वहीं, इस पूरे मामले में अमेरिका की भूमिका भी अहम हो गई है। अमेरिका शुरू से इजरायल के समर्थन में रहा है और उसने ईरान को कई बार चेतावनी भी दी है। जानकारों का मानना है कि अगर जंग और बढ़ती है, तो अमेरिका सीधे सैन्य रूप से शामिल हो सकता है, जिससे हालात पूरी तरह से बिगड़ सकते हैं।
IAEA की रिपोर्ट ने जिस युद्ध की नींव रखी, अब उसी रिपोर्ट के आधार पर पलटी मार देना वैश्विक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। और सबसे बड़ा सवाल—अगर यह रिपोर्ट गलत थी, तो इस युद्ध की जिम्मेदारी कौन लेगा, जिसमें अब तक सैकड़ों जिंदगियां तबाह हो चुकी हैं?
Editorial

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