नए खेल का आगाज; अमेरिकाने ईरान कब्जे की रची चाल
मध्य पूर्व एक बार फिर भयंकर युद्ध की आग में झुलस रहा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण टकराव में अब तीसरी बड़ी ताकत अमेरिका के प्रवेश की आहट तेज़ हो गई है। इजराइल के समर्थन में अमेरिका लगातार बयानबाज़ी कर रहा है और व्हाइट हाउस में इसको लेकर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वे आने वाले दो हफ्तों में यह तय करेंगे कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ इजराइली सैन्य अभियान में शामिल होगा या नहीं। इस बीच एक बड़ा सवाल भी दुनिया के सामने खड़ा हैअगर ईरान यह जंग हार जाता है, तो क्या अमेरिका उस पर कब्जा कर लेगा?
ईरान और अमेरिका: दशकों पुरानी दुश्मनी :
हालांकि यह युद्ध इजराइल और ईरान के बीच चल रहा है, लेकिन अमेरिका की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। ईरान और अमेरिका वर्षों से कट्टर दुश्मन हैं। अमेरिका ने ईरान पर कई कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, और उन देशों को भी सज़ा देने की चेतावनी दी है जो ईरान से व्यापार करते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका लंबे समय से ईरान में सत्ता परिवर्तन की मंशा रखता है, ठीक उसी तरह जैसे वह इराक और अफगानिस्तान में कर चुका है। हालांकि उन अभियानों में अमेरिका को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन वह अब ईरान को एक रणनीतिक मोहरे के रूप में देखता है।
अमेरिका की नज़र ईरान के संसाधनों पर :
  • ईरान केवल एक धार्मिक या सामरिक दुश्मन नहीं है, बल्कि एक ज्यादा बड़ा भू-आर्थिक लक्ष्य भी है।
  • तेल के भंडार के मामले में ईरान दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
  • प्राकृतिक गैस में यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।
  • इसके अलावा यूरानियम और अन्य दुर्लभ खनिज भी ईरान में बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
इन संसाधनों पर नियंत्रण पाने की लालसा किसी भी वैश्विक शक्ति के लिए स्वाभाविक है, और अमेरिका इस मौके को खोना नहीं चाहता।
रणनीतिक लोकेशन भी अमेरिका की रुचि का कारण :
ईरान की सीमाएँ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, तुर्किए, रूस और आर्मेनिया से मिलती हैं। यह क्षेत्र एशिया की राजनीति और खनिज व्यापार का केंद्र है। यदि अमेरिका को ईरान में नियंत्रण मिलता है, तो वह न सिर्फ इस्लामिक कट्टरता को रोकने का दावा करेगा, बल्कि मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया में सामरिक बढ़त भी हासिल कर सकता है।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
क्या होगा अगर ईरान हारता है ?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ईरान को इस युद्ध में करारी हार मिलती है, तो अमेरिका मौके का फायदा उठाकर वहां अपना प्रभाव स्थापित कर सकता है। यह कब्जा सीधा सैन्य न भी हो, लेकिन राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभुत्व के रूप में सामने आ सकता है जैसे इराक और अफगानिस्तान में देखा गया था।
ईरान और इजराइल की जंग अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है। इसमें अमेरिका की संभावित भूमिका ने इसे वैश्विक रणनीतिक संघर्ष में तब्दील कर दिया है। ऐसे में यदि ईरान यह लड़ाई हारता है, तो यह सवाल और अधिक तीव्र हो जाएगा कि क्या अमेरिका वास्तव में ईरान पर कब्जा करना चाहता है, या यह भी एक नई जियो-पॉलिटिकल चाल का हिस्सा है।
Editorial

Editorial

Next Story