✕
S-400 के साथ भारतीय 'अग्नि शक्ति'; अब रूस भी ले रहा नोट!
By EditorialPublished on
यूक्रेन-रूस युद्ध एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन ने हाल ही में रूस पर अभूतपूर्व ड्रोन हमला कर दुनिया को चौंका दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, इस हमले में 117 ड्रोन इस्तेमाल किए गए और रूस के पांच एयरबेस तबाह कर दिए गए। इस हमले

x

यूक्रेन-रूस युद्ध एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन ने हाल ही में रूस पर अभूतपूर्व ड्रोन हमला कर दुनिया को चौंका दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, इस हमले में 117 ड्रोन इस्तेमाल किए गए और रूस के पांच एयरबेस तबाह कर दिए गए। इस हमले में रूस के करीब 40 लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचा। यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि रूस के पास दुनिया का सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम — S-400 — मौजूद है, जिसे दुनिया भर में अजेय माना जाता है।
अब सवाल उठता है कि अगर भारत S-400 की मदद से पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोक सकता है, तो रूस कैसे चूक गया? इसका जवाब छुपा है भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम — ‘आकाशतीर’ — में।
ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सफलता :
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 के साथ ‘आकाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया। DRDO और इसरो द्वारा विकसित यह स्वदेशी सिस्टम बेहद तेज और लो-एल्टिट्यूड हवाई हमलों से निपटने में सक्षम है। पाकिस्तान ने तुर्की निर्मित बायरक्तार TB2 ड्रोन और चीन की PL-15 मिसाइलों से हमला किया था, लेकिन ‘आकाशतीर’ और S-400 की साझेदारी ने इन खतरों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।
रूस की चूक: क्या सिर्फ S-400 काफी है ?
S-400 लंबी दूरी की मिसाइलों और जेट फाइटरों को रोकने में सक्षम है, लेकिन ड्रोन जैसे लो-एल्टिट्यूड और तेजी से बदलने वाले लक्ष्यों को रोकने के लिए एक लो-लेवल, हाई-फ्लेक्सिबल डिफेंस सिस्टम की जरूरत होती है। यही वह कमी है जो रूस को भारी पड़ी। यदि रूस के पास भारत जैसा मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम होता, जिसमें S-400 और ‘आकाशतीर’ जैसी तकनीकें मिलकर काम करतीं, तो शायद यूक्रेन को इतनी सफलता नहीं मिलती।
‘आकाश’ क्यों है खास ?
‘आकाश’ एयर डिफेंस सिस्टम रडार, सेंसर, और अत्याधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क के साथ रियल-टाइम में दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई खतरों का पता लगाता है और उन्हें पलक झपकते ही मार गिराता है। यह प्रणाली 25 किलोमीटर की दूरी तक उड़ान भरने वाले लक्ष्यों को सटीकता से भेद सकती है। ऑपरेशन सिंदूर में इसने 400 से अधिक ड्रोन, कामिकाजी ड्रोन और लॉइटरिंग म्युनिशन को सफलतापूर्वक नष्ट किया।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
रूस को सीखने की जरूरत :
यूक्रेन के हमले के बाद यह साफ हो गया है कि आधुनिक युद्ध केवल बड़े और भारी सिस्टम से नहीं जीते जाते। छोटे, तेज और रियल-टाइम में प्रतिक्रिया देने वाले सिस्टम भी उतने ही जरूरी हैं। भारत ने अपने स्वदेशी डिफेंस सिस्टम में यह संतुलन बखूबी साधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस को भारत की तरह मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क अपनाना चाहिए। S-400 अकेले काफी नहीं है। अगर रूस के पास ‘आकाशतीर’ जैसा सिस्टम होता, तो शायद यूक्रेन को इतनी बड़ी कामयाबी नहीं मिलती।
इस पूरी घटना से यह भी साबित होता है कि भारत न केवल वैश्विक डिफेंस तकनीक का उपभोक्ता है, बल्कि निर्माता और अब निर्यातक भी बन चुका है। रूस को शायद अब भारत से कुछ सीखने की जरूरत है।
यह भी पढे :

Editorial
Next Story
Related News
X
