तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक; यूक्रेन की एक गलती बनेगी काल

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी युद्ध अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन ने हाल ही में रूस के पांच सैन्य एयरबेस पर ड्रोन के जरिए ऐसा हमला किया है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक एक्शन माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस हमले में रूस के करीब 40 बॉम्बर विमान बर्बाद हो गए हैं, जिनमें TU-95 और TU-22 जैसे रणनीतिक परमाणु बमवर्षक शामिल हैं।
यूक्रेन का यह हमला अचानक नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल से ‘ऑपरेशन स्पाइडर्स वेब’ के नाम से इस हमले की प्लानिंग की जा रही थी। ड्रोन हमले की यह तकनीक बेहद खास थी—116 छोटे FPV ड्रोन्स को ट्रकों में लकड़ी के बक्सों में छिपाकर रूस की सीमा से 2000 किलोमीटर अंदर तक पहुंचाया गया और फिर एक साथ हमला बोला गया। इन ड्रोनों में AI और ऑटो-होमिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था, जिससे हमला सटीक और विध्वंसक बना।
पुतिन की चुप्पी डरावनी :
अब सवाल उठता है कि इस हमले के बाद रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी? राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई बार खुले मंचों से यूक्रेन और उसके समर्थक देशों को परमाणु हमले की चेतावनी दे चुके हैं। इसके साथ ही रूस ने बीते कुछ महीनों में अपने न्यूक्लियर हथियारों को हाई-अलर्ट मोड पर रखा है। यूक्रेन के इस हमले को अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक गलियारों में 'पर्ल हार्बर मोमेंट' कहा जा रहा है—एक ऐसा हमला जो किसी सुपरपावर को युद्ध में उतरने के लिए मजबूर कर देता है।
चौंकाने वाली बात ये है कि इस हमले से कुछ घंटे पहले ही रूस की ओर से संघर्षविराम की बातचीत के संकेत मिले थे। रूस का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय पर चर्चा के लिए इस्तांबुल भी पहुंचा था। ऐसे में यूक्रेन का हमला उस संभावित शांति की दिशा में एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

अगर रूस ने परमाणु हमला किया तो...
अगर रूस इस हमले के जवाब में परमाणु हथियारों का प्रयोग करता है, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु भंडार है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि वह टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार—जिनकी मारक क्षमता सीमित क्षेत्र में होती है—का उपयोग कर सकता है ताकि बड़े पैमाने पर चेतावनी भी दी जा सके और दुनिया को झकझोरने वाला संदेश भी भेजा जा सके।
परमाणु हमले की स्थिति में यूक्रेन के साथ-साथ उसके पड़ोसी देश भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। पोलैंड, हंगरी, रोमानिया, मोल्दोवा के अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे देश भी रेडिएशन के प्रभाव में आ सकते हैं।

क्या तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक ?
अब सबकी नजरें क्रेमलिन और व्लादिमीर पुतिन पर हैं। दुनिया यह जानने को बेचैन है कि रूस किस दिशा में अगला कदम उठाएगा। क्या यह एक सीमित जवाबी हमला होगा या फिर तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत? इस सवाल का जवाब आने वाले कुछ दिनों में पूरी दुनिया की दिशा तय कर सकता है।
Editorial

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