छिपा हमला! रूस-यूक्रेन युद्ध में
रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक नए और चौंकाने वाले चरण में पहुंच चुका है। यूक्रेन ने रविवार को रूस के खिलाफ एक बेहद चतुर और घातक रणनीति का इस्तेमाल करते हुए ट्रोजन हॉर्स स्टाइल हमला किया, जिसने रूस के पांच बड़े मिलिट्री एयरफील्ड्स को हिला कर रख दिया। इस हमले में ड्रोन, ट्रक और रणनीतिक छल का ऐसा घातक मेल देखा गया, जिसकी प्रेरणा सीधे ग्रीक पौराणिक कथा 'ट्रोजन हॉर्स' से ली गई है।
इस हमले ने न सिर्फ रूस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी एक कड़ा सबक और चेतावनी छोड़ दी है, जहां सीमावर्ती देशों से आने-जाने वाले वाहनों की संख्या हजारों में है।
कैसे हुआ हमला? ट्रकों में छिपाए गए 'स्वार्म ड्रोन' :
यूक्रेन को अच्छे से मालूम था कि रूस की सीमावर्ती हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense System) बेहद मजबूत है और वहां से सीधे ड्रोन भेजना आत्मघाती हो सकता है। ऐसे में यूक्रेनी खुफिया एजेंसी SBU ने एक बेहद शातिर योजना बनाई — ‘स्पाइडर-वेब ऑपरेशन’।
यूक्रेन ने सिविलियन ट्रकों के जरिए रूस के अलग-अलग प्रांतों में फाल्स सीलिंग के नीचे बड़ी संख्या में FPV ड्रोन (First Person View) छिपाकर भेजे। इन ड्रोन में विस्फोटक और बम फिट किए गए थे। ट्रकों को रूस के मुरमांस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रेयजन और अमूर जैसे मिलिट्री एरिया में खड़ा किया गया और फिर रिमोट कंट्रोल से सीलिंग खोलकर ड्रोन को रिलीज किया गया। ड्रोन ने सीधे उन एयरबेस पर हमला किया जहां परमाणु हथियार ले जाने वाले रूसी बॉम्बर्स खड़े थे। कई विमानों में आग लग गई और बर्बादी का मंजर सामने आया।
रूस को बड़ा नुकसान, भारत के लिए सबक :
रूसी मीडिया के मुताबिक, हमले में 40 से ज़्यादा स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स को नुकसान हुआ है। रूस ने दावा किया है कि कुछ इलाकों में ड्रोन को मार गिराया गया, लेकिन मुरमांस्क और इरकुत्स्क में बड़ा नुकसान हुआ है।
यह हमला केवल रूस के लिए नहीं, बल्कि भारत के लिए भी एक चेतावनी है। भारत में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे देशों से हजारों ट्रक हर रोज़ सामान लेकर आते हैं। कुछ साल पहले तक पाकिस्तान से भी वाघा बॉर्डर और जम्मू-कश्मीर के रास्ते व्यापारिक ट्रक आते थे। ऐसे में अगर इसी तरह की ट्रोजन रणनीति भारत के खिलाफ अपनाई जाए, तो सुरक्षा के लिहाज़ से भारी जोखिम हो सकता है।
पर्ल हार्बर की याद दिलाता है यह हमला :
यूक्रेन का यह हमला कई मामलों में 1941 के जापानी 'पर्ल हार्बर' हमले की याद दिलाता है, जहां बिना किसी चेतावनी के अमेरिका के नौसैनिक बेस पर अचानक हमला कर दिया गया था। उसी तरह, यूक्रेन ने रूस के अंदर गहरे तक जाकर उसकी सैन्य क्षमता पर सीधा वार किया और वो भी छल-रणनीति के जरिए।

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क्या भारत तैयार है ?
इस ऑपरेशन से यह साफ हो गया है कि युद्ध के नियम बदल चुके हैं। अब दुश्मन सिर्फ सीमा पर नहीं, आपके घर के अंदर भी छिपा हो सकता है ट्रक, ड्रोन, या किसी सिविलियन गाड़ी के ज़रिए। भारत को अपनी सीमाओं पर आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी को और अधिक हाईटेक और मल्टी-लेयर बनाना होगा। वरना आने वाले समय में कोई 'स्पाइडर-वेब' ऑपरेशन भारत को भी जाल में फंसा सकता है।
Editorial

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