ट्रक के गुप्त चैंबर में 688 किलो डोडा-चूरा की तस्करी का पर्दाफाश, 34 लाख का नशीला पदार्थ बरामद
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। रायला थाना पुलिस ने भीलवाड़ा-अजमेर हाइवे पर नाकाबंदी के दौरान एक ट्रक से 688 किलो डोडा-चूरा बरामद किया है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 34 लाख रुपये बताई जा रही है। पंजाब के पटियाला जिले के निवासी ट्रक चालक को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भीलवाड़ा, 19 जून 2025 - राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। रायला थाना पुलिस ने भीलवाड़ा-अजमेर हाइवे पर नाकाबंदी के दौरान एक ट्रक से 688 किलो डोडा-चूरा बरामद किया है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 34 लाख रुपये बताई जा रही है। पंजाब के पटियाला जिले के निवासी ट्रक चालक को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
नाकाबंदी के दौरान शक और गिरफ्तारी
बुधवार की दोपहर रायला थाना पुलिस टीम भीलवाड़ा-अजमेर हाइवे पर नियमित नाकाबंदी कर रही थी। इस दौरान भीलवाड़ा की दिशा से आ रहे एक ट्रक को रोका गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चालक का व्यवहार संदेहजनक लग रहा था और वह पुलिस की पूछताछ के दौरान घबराहट में दिख रहा था।
ट्रक चालक ने अपना परिचय पंजाब के पटियाला जिले के दौड़दा गांव निवासी परगट सिंह (46 वर्ष) पुत्र दशरथ सिंह के रूप में दिया। पुलिस ने जब ट्रक में लदे माल के बारे में पूछताछ की तो परगट सिंह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिससे पुलिस को और भी शक हुआ।
गुप्त चैंबर में छुपाया गया नशीला पदार्थ
पुलिस की संदेह की पुष्टि तब हुई जब उन्होंने ट्रक की विस्तृत जांच की। अधिकारियों ने ट्रक की संरचना का बारीकी से निरीक्षण किया और पाया कि वाहन में एक गुप्त चैंबर बनाया गया था। यह चैंबर इतनी चतुराई से बनाया गया था कि सामान्य निरीक्षण में इसका पता लगाना मुश्किल था।
गुप्त चैंबर को खोलने पर पुलिस को 24 कट्टों में भरा डोडा-चूरा मिला। यह नशीला पदार्थ बेहद सावधानी से पैक किया गया था और इसे ढंकने के लिए अन्य सामान का भी इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने तुरंत इस डोडा-चूरा को जब्त कर लिया और इसका वजन करवाया।
688 किलो डोडा-चूरा की बरामदगी
पुलिस द्वारा किए गए वजन के अनुसार, ट्रक से कुल 688 किलो डोडा-चूरा बरामद किया गया। यह काफी बड़ी मात्रा है और इससे पता चलता है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं था, बल्कि एक व्यवस्थित तस्करी का हिस्सा था। पुलिस के अनुसार, बरामद डोडा-चूरा की बाजार में कीमत लगभग 34 लाख रुपये है।
डोडा-चूरा अफीम से निकलने वाला एक नशीला पदार्थ है, जिसका अवैध व्यापार भारत में प्रतिबंधित है। इसका उपयोग मुख्यतः नशे के लिए किया जाता है और यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने परगट सिंह को तुरंत गिरफ्तार कर लिया और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। यह कानून भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी, बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत इस मात्रा में डोडा-चूरा की तस्करी एक गंभीर अपराध है, जिसकी सजा 10 साल से 20 साल तक की कैद हो सकती है। साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
पूछताछ और आगे की जांच
फिलहाल पुलिस परगट सिंह से डोडा-चूरा की खरीद-फरोख्त के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और परगट सिंह सिर्फ एक वाहक की भूमिका निभा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि वे जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह डोडा-चूरा कहां से आया था और इसे कहां पहुंचाया जाना था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तस्करी में और भी लोग शामिल हैं।
तस्करी का रूट और मोडस ऑपरेंडी
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि तस्कर भीलवाड़ा-अजमेर हाइवे का इस्तेमाल अपने अवैध धंधे के लिए कर रहे थे। यह रूट राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है और तस्करों के लिए सुविधाजनक माना जाता है।
ट्रक में गुप्त चैंबर का निर्माण इस बात का प्रमाण है कि तस्कर अपने अवैध काम में काफी पेशेवर हो गए हैं। वे पुलिस की नाकाबंदी से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
पुलिस की सफलता और भविष्य की रणनीति
रायला थाना पुलिस की यह कार्रवाई नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता है। इससे न केवल 34 लाख रुपये मूल्य का नशीला पदार्थ बाजार में पहुंचने से रुका है, बल्कि एक बड़े तस्करी नेटवर्क का भी पर्दाफाश हो सकता है।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की गहरी जांच करेंगे और सभी संबंधित व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाएंगे। साथ ही भविष्य में भी ऐसी नाकाबंदी और जांच को जारी रखा जाएगा ताकि नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जा सके।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पुलिस की सतर्कता और कुशल जांच से कैसे बड़े अपराधों का पर्दाफाश किया जा सकता है।

