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रूस की GDP पर मंडराया खतरा; मंदी की दस्तक से उड़ी नींद
By EditorialPublished on
रूस की इकोनॉमी पर मंडराया मंदी का साया, सरकार की चिंता बढ़ी रूस की अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है। देश के आर्थिक हालात को देखते हुए सरकार ने पहली बार साल 2022 के बाद ब्याज दरों में कटौती की है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आर्थिक मोर्चे पर हालात गंभीर हैं। महंगाई पर काबू पाने के लिए उठाए गए इस कदम को अर्थशास्त्री अंतिम चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं। उधर, रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री ने भी सार्वजनिक मंच से मंदी की आशंका जाहिर करते हुए कहा कि अगर वैश्विक हालात और घरेलू दबाव ऐसे ही बने रहे तो अर्थव्यवस्

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रूस की अर्थव्यवस्था गहरे संकट की ओर बढ़ रही है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने गुरुवार को खुद इस बात की पुष्टि की कि देश की अर्थव्यवस्था मंदी के बेहद करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस आर्थिक गिरावट को रोकना मुश्किल होगा।
ब्याज दरों में कटौती, लेकिन असर नाकाफी :
रूस ने इस महीने 2022 के बाद पहली बार ब्याज दरों में कटौती की है। अब दर 21% से घटकर 20% हो गई है। सरकार की मंशा है कि इससे निवेश बढ़े और बाजार में लिक्विडिटी आए। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी मामूली कटौती से निवेशकों का भरोसा नहीं लौटेगा। कारोबारियों को अब भी लोन महंगा लग रहा है।
सेंट्रल बैंक और बैंकों ने जताई चिंता :
रूस की सेंट्रल बैंक की गवर्नर एल्विरा नबीउलिना ने कहा कि देश के मौजूदा कारोबारी हालात ऐसे हैं कि इसे मंदी का संकेत माना जा सकता है। रूस के सबसे बड़े बैंक ‘सर्बैंक’ के डिप्टी सीईओ अलेक्जेंडर वेड्याखिन ने चेताया कि कड़ाई से लागू मौद्रिक नीतियां अर्थव्यवस्था को सुस्ती में धकेल सकती हैं। उन्होंने 12-14% ब्याज दर को सही बताया, जिससे निवेश को बल मिल सके।
यूक्रेन युद्ध और बढ़ती महंगाई बनी बड़ी वजह :
यूक्रेन युद्ध रूस की आर्थिक समस्याओं की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। युद्ध की वजह से न सिर्फ रूस का रक्षा खर्च दोगुना हो गया है, बल्कि देश में महंगाई भी बेकाबू हो चुकी है। साल 2024 में मुद्रास्फीति 9.5% रही और 2025 में इसके और बढ़ने की आशंका है। रोजमर्रा के सामान जैसे आलू, प्याज, अंडे और सब्जियों की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं।
इसके अलावा युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता की वजह से देश में लेबर माइग्रेशन तेज हो गया है। पढ़े-लिखे युवा और कुशल कामगार रोजगार और सुरक्षा की तलाश में विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे देश के उत्पादन और सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
डिफेंस खर्च पर ज़ोर, बाकी सेक्टर उपेक्षित :
रूस ने 2024 और 2025 में रक्षा बजट में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। संसद ड्यूमा ने 126 बिलियन डॉलर (करीब 10 लाख 67 हजार करोड़ रुपये) के डिफेंस बजट को मंजूरी दी है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे सेक्टरों में निवेश घटता जा रहा है, जो आर्थिक पुनरुद्धार के लिए जरूरी होते हैं।
एक्सपोर्ट से भी झटका :
रूस की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस के निर्यात पर निर्भर है, लेकिन यूक्रेन पर हमले के बाद 45 से अधिक देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसका असर यह हुआ कि रूस का एक्सपोर्ट 2023 में घटकर 394 बिलियन डॉलर रह गया, जो 2018 में 436 बिलियन डॉलर था। 2024 और 2025 में यह गिरावट और तेज हो गई है। मई 2025 में रूस को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से 12.6 बिलियन डॉलर की आय हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4 बिलियन डॉलर कम है। यह गिरावट बताती है कि रूस की राजस्व प्रणाली भी चरमरा रही है।
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आगे क्या ?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस को तत्काल आर्थिक सुधारों, अंतरराष्ट्रीय विश्वास बहाली और घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों पर ध्यान देना होगा। यदि मौजूदा हालात पर लगाम नहीं लगी, तो रूस की इकोनॉमी लंबी मंदी की गिरफ्त में जा सकती है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ेगा।

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