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भारत ने नहीं दिखाया भरोसा; ट्रंप की 'तीन देशों' की डील अधूरी!
By EditorialPublished on 19 Jun 2025 5:30 AM IST
व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मौजूदगी के बीच एक और दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया था कि वह कनाडा यात्रा से लौटते वक्त अमेरिका में एक संक्षिप्त दौरे पर रुकें। बताया जा रहा है कि ट्रंप की मंशा थी कि मोदी और मुनीर के बीच किसी मंच पर 'संयोगवश मुलाकात' हो जाए। हालांकि, पीएम मोदी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम और रणनीतिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए ट्रंप के इस प्रस्ताव को सधी हुई चुप्पी में

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी 'इवेंट पॉलिटिक्स' के लिए चर्चा में हैं। इस बार मामला था पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस में बुलाकर लंच देने का। लेकिन लंच से ज्यादा सुर्खियों में है ट्रंप की कोशिश, जिसमें वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुनीर का 'संयोगवश' आमना-सामना करवाना चाहते थे।
दरअसल, ट्रंप ने पीएम मोदी को कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका आने का न्योता दिया था। सूत्रों के मुताबिक, 18 जून को ट्रंप और मोदी के बीच 35 मिनट की फोन बातचीत भी हुई, जिसमें ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि पीएम अमेरिका आएं। लेकिन पीएम मोदी ने 'व्यस्त कार्यक्रम' का हवाला देकर इस निमंत्रण को ठुकरा दिया।
अब सवाल उठ रहा है – क्या ट्रंप सच में मोदी और मुनीर को एक ही मंच पर लाकर दुनिया को शांति का ‘डेमो’ दिखाना चाहते थे? ट्रंप की मंशा थी कि वे खुद को भारत-पाक के बीच सीजफायर का सूत्रधार साबित कर सकें, जो उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार की ओर ले जाए।
इस बीच, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर को लंच पर बुलाया, लेकिन न कोई तस्वीर जारी हुई, न कोई प्रेस ब्रीफिंग हुई – जो ट्रंप के लिए बहुत असामान्य है। इस गोपनीय मुलाकात को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता अन्ना केली ने बताया कि मुनीर ने खुद ट्रंप से अपील की थी कि भारत-पाक युद्ध रोकने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाए। इसीलिए ट्रंप ने अपने स्तर से नीचे उतरकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख से मुलाकात की।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “मैंने दो परमाणु ताकतों के बीच युद्ध को रोका। मोदी एक शानदार नेता हैं और पाकिस्तान की ओर से भी संवाद हुआ। मैं शांति चाहता हूं।” लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने पाकिस्तान की गुहार पर, सीधे सैन्य स्तर पर सीजफायर की शर्तें तय की थीं – किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बिना।
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पीएम मोदी ने जी-7 सम्मेलन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंक फैलाने वाले देशों की तुलना आतंक से पीड़ित देशों से नहीं की जा सकती। इशारा साफ था – अमेरिका और पाकिस्तान को भारत की सुरक्षा नीति में घुसपैठ की कोई जरूरत नहीं।
अब सवाल ये भी है कि ट्रंप को पाकिस्तान अचानक इतना प्यारा क्यों लगने लगा? वो पाकिस्तान, जिसने ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पाल-पोसकर रखा। जवाब है – नोबेल की लालसा। मुनीर की तरफ से शांति पुरस्कार की अपील ने ट्रंप को पाकिस्तान के साथ 'पब्लिक रिलेशन' मजबूत करने की राह पर ला दिया है।
भारत-पाक सीजफायर की हकीकत वही है जो ऑपरेशन सिंदूर ने सबको दिखाई – पाकिस्तान झुका, भारत ने मौका दिया। लेकिन अगर फिर से आतंकी हरकत हुई, तो भारत जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा – चाहे व्हाइट हाउस में कोई भी लंच क्यों न हो रहा हो।

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