भीलवाड़ा, 19 जून 2025 - जहाजपुर कस्बे में गत वर्ष जलझुलनी एकादशी के दौरान हुए सांप्रदायिक तनाव के मुख्य आरोपी आदिल डंका को राजस्थान पुलिस ने जयपुर जिले के बगरू से गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से फरार चल रहे आदिल डंका को डीएसटी की सहायता से पकड़ा गया और बुधवार को उसे पुलिस थाने से न्यायालय तक पैदल जुलूस के रूप में ले जाया गया।


आदिल डंका की पहचान और पृष्ठभूमि

जहाजपुर पुलिस के अनुसार, आदिल मोहम्मद उर्फ आदिल डंका, जो शरीफ मोहम्मद देशवाली का पुत्र है, न केवल जहाजपुर थाने का इतिहासपत्रक अपराधी है, बल्कि सितंबर 2024 में हुई सांप्रदायिक घटना का मुख्य साजिशकर्ता भी है। डीएसपी नरेंद्र पारीक ने स्पष्ट किया कि आदिल डंका का अपराधिक इतिहास लंबा है और यह व्यक्ति क्षेत्र में शांति भंग करने के लिए कुख्यात है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आदिल डंका ने पहले भी कई बार स्थानीय त्योहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में व्यवधान डालने का प्रयास किया है। उसकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।


गिरफ्तारी की प्रक्रिया और जुलूस

जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई थी, जिसने कई दिनों की निरंतर खोजबीन के बाद आदिल डंका का पता लगाया। डीएसटी की तकनीकी सहायता से पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी जयपुर जिले के बगरू में छुप रहा है।

बुधवार की सुबह, पुलिस टीम ने आदिल डंका को जहाजपुर थाने से न्यायालय तक एक प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में ले जाने का निर्णय लिया। यह जुलूस पैदल निकाला गया, जो पुलिस थाने से शुरू होकर बस स्टैंड होते हुए न्यायालय तक गया। इस दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई, जो आदिल डंका को देखने के लिए सड़कों पर आ गई।

न्यायालय में पेशी के बाद, न्यायाधीश के आदेश पर आदिल डंका को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उसकी न्यायिक हिरासत की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।


मूल घटना का विवरण

सितंबर 2024 में जलझुलनी एकादशी के दिन दोपहर लगभग 2:30 बजे यह घटना घटित हुई थी। हिंदू समुदाय के लोग पारंपरिक बेवाण (धार्मिक जुलूस) निकाल रहे थे, जब जामा मस्जिद के पास पहुंचने पर उन्होंने सम्मान प्रदर्शित करते हुए अपने वाद्य यंत्र बंद कर दिए और केवल जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।

इस व्यवस्था के बावजूद, आदिल डंका के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि वे मस्जिद के सामने से बेवाण नहीं निकलने देंगे। जब पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, तो आदिल डंका और उसके साथियों ने अधिकारियों को धमकाना शुरू कर दिया।


पत्थरबाजी और हिंसा

स्थिति और भी गंभीर हो गई जब आदिल डंका के निर्देश पर जामा मस्जिद की छत से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस हमले में तत्कालीन थानेदार भंवर लाल, कांस्टेबल कमलेश और मुकेश घायल हो गए। पत्थरबाजी से भगदड़ मच गई और क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

जांच की प्रगति

डीएसपी नरेंद्र पारीक ने बताया कि इस मामले में अब तक 25 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें आदिल डंका सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस का कहना है कि आदिल डंका ने पूरी साजिश रची थी और अन्य आरोपियों को भड़काने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

"आदिल डंका की गिरफ्तारी इस मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता है," डीएसपी पारीक ने कहा। "वह न केवल इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता था, बल्कि अन्य आरोपियों को भी भड़काने में उसकी भूमिका थी।"


आगे की कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है। आदिल डंका से पूछताछ के दौरान अन्य साजिशकर्ताओं के नाम सामने आने की संभावना है। मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की उम्मीद है।

यह घटना धार्मिक सद्भावना और सामुदायिक एकता के महत्व को रेखांकित करती है, और आदिल डंका जैसे तत्वों द्वारा फैलाई जाने वाली नफरत के खिलाफ कानून व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।

Editorial

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