वाइस चेयरमैन योगी पर यौन शोषण का आरोप, बदले में ब्लैकमेलिंग का काउंटर केस
गुलाबपुरा में एक गंभीर कानूनी विवाद सामने आया है जहां नगर पालिका के वाइस चेयरमैन एवं अधिवक्ता सांवर नाथ योगी और एक महिला के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी नैतिकता के सवालों को उठाता है।


भीलवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता) - गुलाबपुरा में एक गंभीर कानूनी विवाद सामने आया है जहां नगर पालिका के वाइस चेयरमैन एवं अधिवक्ता सांवर नाथ योगी और एक महिला के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी नैतिकता के सवालों को उठाता है।
प्रारंभिक विवाद की शुरुआत
मामले की शुरुआत 2020 में हुई थी जब एक महिला ने अधिवक्ता सांवर नाथ योगी से संपर्क किया था। महिला का कहना था कि उसका पति उसके साथ मारपीट करता है और दहेज की मांग करता है। इस समस्या के समाधान के लिए उसने योगी से कानूनी सहायता मांगी थी।
योगी ने महिला के मामले को गंभीरता से लेते हुए 125 सीआरपीसी के तहत अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुलाबपुरा में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। साथ ही उन्होंने 498ए और 406 भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत न्यायालय में इस्तगासा भी पेश किया और मुकदमा दर्ज करवाने के आदेश भी दिलवाए।
मतभेद और फीस विवाद
कुछ समय बाद स्थिति में बदलाव आया जब महिला ने किसी अन्य वकील से पैरवी करवाने के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की मांग की। इस पर योगी ने अपनी कानूनी फीस का तकाजा किया, जो किसी भी अधिवक्ता का वैध अधिकार है। लेकिन महिला ने कहा कि वह केस समाप्त होने के बाद फीस का भुगतान करेगी।
25 फरवरी 2025 को जब मामले में दूसरे अधिवक्ता के माध्यम से राजीनामा हो गया, तो योगी ने दोबारा अपनी फीस की मांग की। इस पर महिला की प्रतिक्रिया आक्रामक थी और उसने धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया।
गंभीर धमकियां और आरोप
योगी के अनुसार, महिला ने उन्हें धमकी देते हुए कहा था, "तुम्हें वकालत करना भुला दूंगी। तुम्हारी राजनीति खत्म कर दूंगी।" इसके अलावा उसने जान से मारने की धमकी भी दी थी। सबसे गंभीर बात यह थी कि महिला ने कहा था कि जयपुर में उसके पास "बहुत से गुंडे" हैं।
महिला की धमकियों में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उसने कहा था कि अगर योगी ने उसे हर महीने एक लाख रुपए नहीं दिए तो वह यौन शोषण का झूठा मुकदमा दर्ज करवाकर उनकी छवि धूमिल कर देगी और उन्हें मरवा देगी।
पूर्व में भी समान गतिविधियां
योगी का आरोप है कि यह महिला पहले भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल रही है। उनके अनुसार महिला ने स्वयं कहा था कि उसने पूर्व में बांसवाड़ा, जैनपुरा, आसींद और जैतारण के लोगों को भी इसी तरह जाल में फंसाकर लाखों रुपए ऐंठे हैं। यह आरोप इस मामले की गंभीरता को और भी बढ़ा देता है।
योगी के अनुसार, थाना जैतारण में भी इस महिला के खिलाफ पूर्व में मुकदमा दर्ज है, जो उनके आरोपों की पुष्टि करता है।
महिला का पलटवार
दूसरी तरफ, इसी महिला ने गत दिनों गुलाबपुरा थाने में योगी के खिलाफ यौन शोषण और रुपयों की मांग करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। महिला का यह कदम योगी के आरोपों के ठीक विपरीत है।
यह स्थिति एक जटिल कानूनी पहेली बन गई है जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। एक तरफ महिला यौन शोषण का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ योगी ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का आरोप लगा रहे हैं।
पुलिस की चुनौती
गुलाबपुरा पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर केस दर्ज कर लिए हैं और अब दोनों ही पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की गहन जांच-पड़ताल कर रही है।
इस मामले में सच्चाई क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन यह घटना कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है - कानूनी पेशे में नैतिकता, झूठे मुकदमों की समस्या, और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग।
व्यापक सामाजिक प्रभाव
यह मामला समाज के लिए चिंता का विषय है। अगर योगी के आरोप सच हैं तो यह दिखाता है कि कैसे कुछ लोग कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल करते हैं। वहीं अगर महिला के आरोप सच हैं तो यह दिखाता है कि कैसे पावर पोजीशन वाले लोग अपनी स्थिति का दुरुपयोग करते हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच का इंतजार करना होगा। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और कानूनी पेशे की गरिमा से जुड़ा है। सच्चाई जो भी हो, यह जरूरी है कि न्याय हो और दोषी को सजा मिले, चाहे वह कोई भी हो।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना और उसका दुरुपयोग न करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

