बस्सी (प्रात:काल संवाददाता) - चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी क्षेत्र में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीएनबी) की एक बड़ी कार्रवाई में 1221 किलो 730 ग्राम डोडाचुरा बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह राजस्थान में डोडाचुरा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता है। डोडाचुरा की इतनी बड़ी मात्रा की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।


डोडाचुरा क्या है और क्यों है खतरनाक

डोडाचुरा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में डेटुरा स्ट्रामोनियम कहते हैं, एक अत्यंत विषाक्त पौधा है जो मुख्यतः मादक पदार्थ के रूप में दुरुपयोग किया जाता है। डोडाचुरा में स्कोपोलामाइन, हायोसायमाइन और एट्रोपाइन जैसे खतरनाक रसायन होते हैं जो इंसान के दिमाग पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। डोडाचुरा का सेवन व्यक्ति को बेहोशी, मतिभ्रम, और कई बार मृत्यु तक पहुंचा सकता है।

राजस्थान में डोडाचुरा की तस्करी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि डोडाचुरा आसानी से उगाया जा सकता है और इसकी कीमत अन्य मादक पदार्थों की तुलना में कम होती है। तस्कर इसे सूखाकर पाउडर बनाते हैं और फिर विभिन्न राज्यों में भेजते हैं। डोडाचुरा का उपयोग अक्सर चोरी, डकैती और अन्य अपराधों में भी किया जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को बेहोश कर देता है।


ऑपरेशन का विस्तृत विवरण

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो चित्तौड़गढ़ की विशेष टीम को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि बस्सी थाना क्षेत्र के जयसिंहपुरा गांव में बड़ी मात्रा में डोडाचुरा का भंडारण किया गया है। इस गुप्त सूचना के आधार पर नारकोटिक्स टीम ने तत्काल एक सुनियोजित ऑपरेशन की योजना बनाई।

टीम ने सुबह के समय जयसिंहपुरा गांव के एक बाड़े पर अचानक छापा मारा। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने देखा कि एक पिकअप गाड़ी डोडाचुरा से भरी हुई थी। डोडाचुरा को बोरियों में भरकर छुपाने का प्रयास किया गया था, लेकिन नारकोटिक्स टीम की तत्परता के कारण तस्कर सफल नहीं हो सके।

जब अधिकारियों ने डोडाचुरा की मात्रा का सटीक वजन किया तो यह 1221 किलो 730 ग्राम निकली, जो लगभग 12 क्विंटल से अधिक है। यह राजस्थान में डोडाचुरा की अब तक की सबसे बड़ी जब्ती में से एक है।


तस्करी नेटवर्क का खुलासा

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह डोडाचुरा स्थानीय स्तर पर उगाया गया था और इसे अन्य राज्यों में भेजने की तैयारी की जा रही थी। तस्करों का मकसद इस डोडाचुरा को गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भेजना था जहां इसकी बड़ी मांग है।

गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार ये सभी स्थानीय निवासी हैं और कई महीनों से डोडाचुरा की तस्करी में लिप्त थे। इनके पास से मिली पिकअप गाड़ी और मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है।


डोडाचुरा की बाजार कीमत और तस्करी का स्केल

विशेषज्ञों के अनुसार, डोडाचुरा की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 200 से 500 रुपए प्रति किलो तक होती है। इस हिसाब से जब्त किए गए 1221 किलो डोडाचुरा की अनुमानित कीमत 3 से 6 लाख रुपए तक हो सकती है। हालांकि यह मात्रा देखकर स्पष्ट है कि यह व्यावसायिक स्तर की तस्करी थी।

डोडाचुरा की तस्करी में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसका उपयोग सिर्फ नशे के लिए ही नहीं बल्कि अपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता है। चोर-उचक्के इसका इस्तेमाल लोगों को बेहोश करने के लिए करते हैं।


कानूनी कार्रवाई और जांच

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने इस मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत डोडाचुरा एक प्रतिबंधित पदार्थ है और इसकी तस्करी में सलिप्त व्यक्तियों को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि डोडाचुरा तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। यह संभावना है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी विभिन्न स्थानों पर सक्रिय हों।


राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा

यह कार्रवाई राजस्थान सरकार द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। राज्य सरकार ने डोडाचुरा, अफीम, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

राजस्थान में डोडाचुरा की खेती मुख्यतः चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद और उदयपुर जिलों में होती है। सरकार इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रख रही है और डोडाचुरा की अवैध खेती को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही है।


समाज के लिए संदेश

यह सफल ऑपरेशन यह संदेश देता है कि राजस्थान सरकार और केंद्रीय एजेंसियां मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही हैं। डोडाचुरा जैसे खतरनाक पदार्थों की तस्करी न सिर्फ सामाजिक बुराई है बल्कि यह युवाओं के भविष्य को भी बर्बाद करती है।

यह कार्रवाई तस्करों के लिए एक चेतावनी है कि कानून का शिकंजा उन तक जरूर पहुंचेगा। समाज के सभी वर्गों को मिलकर डोडाचुरा जैसे मादक पदार्थों के विरुद्ध लड़ना होगा।

Editorial

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