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रेलवेने पार की बड़ी चुनौती; शिंदवणे-आंबले सेक्शन हुआ दोहरी
By EditorialPublished on
मध्य रेलवे ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर पार करते हुए पुणे-मिरज दोहरीकरण परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से — शिंदवणे से आंबले घाट खंड — का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। दुर्गम भूभाग, सुरंगों, ऊंचे तटबंधों और जटिल वायडक्ट पुलों जैसी कई इंजीनियरिंग बाधाओं को पार करते हुए इस खंड का दोहरीकरण रेलवे की तकनीकी क्षमता और समयबद्ध कार्यशैली का बेहतरीन उदाहरण बन गया है। इसके साथ ही, 145 किलोमीटर लंबे पुणे-सतारा खंड का दोहरीकरण भी पूर्ण हो चुका है, जिससे इस पूरे कॉरिडोर में रेल पर

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मध्य रेलवे ने पुणे-मिरज दोहरीकरण परियोजना में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। परियोजना के सबसे कठिन माने जाने वाले शिंदवणे–आंबले घाट खंड का दोहरीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह कार्य रेलवे की तकनीकी दक्षता और समर्पण का प्रतीक बन गया है। साथ ही, 145 किलोमीटर लंबे पुणे–सतारा खंड का दोहरीकरण कार्य भी अब पूर्ण हो गया है, जिससे रेलवे नेटवर्क की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
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चुनौतीपूर्ण भूभाग और इंजीनियरिंग चमत्कार :
9.45 किलोमीटर लंबे शिंदवणे–आंबले खंड को भूगर्भीय और तकनीकी दृष्टि से सबसे जटिल माना गया। इस खंड में:
- 140 मीटर लंबी सुरंग,
- 100 में 1 का तीव्र ग्रेडिएंट,
- 30.5 मीटर के 13 स्पैन वाला विशाल वायडक्ट पुल,
- 42 मीटर ऊँचा सबसे ऊँचा खंभा,
- 5 प्रमुख वायडक्ट पुल जिनमें 18.3 मीटर ऊँचे पीएससी और कम्पोजिट गर्डर लगे हैं,
- 30 लाख क्यूबिक मीटर तटबंध और 20 लाख क्यूबिक मीटर कटिंग कार्य,
- 23 छोटे पुल और
- 16 तीव्र वक्र, जिनमें से एक 6 डिग्री का है जैसी चुनौतियों को पार करते हुए निर्माण कार्य पूरा किया गया।
रेलवे संरक्षा आयुक्त ने दी मंज़ूरी :
दिनांक 17 जून 2025 को रेलवे संरक्षा आयुक्त द्वारा इस खंड का निरीक्षण कर इसे संचालन के लिए मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही पुणे–मिरज दोहरीकरण परियोजना के 279 किलोमीटर में से 258 किलोमीटर हिस्सा अब चालू हो चुका है। शेष हिस्से पर कार्य तेजी से प्रगति पर है।
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यात्री और मालभाड़ा दोनों को मिलेगा लाभ इस दोहरीकरण से :
- ट्रेनों की गति और समयबद्धता में सुधार होगा,
- सड़क मार्ग पर ट्रैफिक कम होगा,
- अतिरिक्त यात्री और मालगाड़ी सेवाएं शुरू की जा सकेंगी,
- और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।
- मध्य रेल की यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘गतिशक्ति योजना’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों को गति देने वाली है।
शिंदवणे–आंबले खंड का समयबद्ध और गुणवत्ता-युक्त दोहरीकरण, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय इंजीनियरिंग की शक्ति और भविष्य की जरूरतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। इस कार्य से न केवल पश्चिम महाराष्ट्र को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संतुलन को भी नया आयाम मिलेगा।
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