इजरायल-ईरान जंग के बीच होर्मुज बना ज्वालामुखी, भारत चितिंत
ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर भयानक टकराव की दहलीज़ पर ला खड़ा किया है। हाल ही में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए इजरायली हमले के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जो शब्द सबसे ज़्यादा चर्चा में है, वह है – "होर्मुज जलडमरूमध्य"।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य ?
होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकीर्ण लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर से जोड़ता है। यह जलडमरूमध्य ईरान, ओमान और यूएई के बीच स्थित है और इसकी लंबाई करीब 161 किलोमीटर और चौड़ाई मात्र 21 मील (लगभग 34 किलोमीटर) है। यह क्षेत्रीय सीमाओं से बहुत दूर होने के बावजूद, भारत जैसे देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत को क्यों है चिंता ?
भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है। अगर होर्मुज में कोई अवरोध उत्पन्न होता है, तो इससे भारत का ऊर्जा बिल बढ़ सकता है, कारोबार पर असर पड़ सकता है, और शेयर बाज़ार में भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
होर्मुज की रणनीतिक अहमियत :
यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा, यानी करीब 17 मिलियन बैरल प्रति दिन की आवाजाही का मार्ग है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रूट से होता है।
यहां स्थित कुछ प्रमुख बंदरगाहों में शामिल हैं:
  • बंदर अब्बास (ईरान) – प्रमुख नौसैनिक और वाणिज्यिक बंदरगाह
  • फुजारिया (यूएई) – तेल भंडारण और शिपिंग केंद्र
  • सोहर (ओमान) – वैकल्पिक व्यापार रूट
  • रास लफ्फान (कतर) – एलएनजी निर्यात का केंद्र
यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, यहां से गुजरने वाले तेल का करीब 83% हिस्सा एशियाई बाज़ारों तक पहुंचता है, जिसमें भारत एक प्रमुख ग्राहक है।
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ईरान की धमकी और वैश्विक प्रतिक्रिया :
ईरान ने इज़रायल के खिलाफ जारी तनाव के बीच इस जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने ऐसा कहा हो, लेकिन इस बार सैन्य हमलों की पृष्ठभूमि इसे कहीं अधिक गंभीर बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस रूट को बंद करता है या यहां कोई सैन्य टकराव होता है, तो इससे वैश्विक तेल कीमतें, शिपिंग कॉस्ट, और डिलीवरी टाइम सभी प्रभावित होंगे।
क्या वाकई ईरान इसे बंद कर सकता है ?
ईरान का कानून उसे जलडमरूमध्य के संकरे हिस्से पर नियंत्रण की अनुमति देता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत वह दूसरे देशों के जहाजों की आवाजाही को रोक नहीं सकता। यदि ऐसा होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होगा, जिससे बड़े स्तर पर कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया संभव है।
इस समय भारत सहित पूरी दुनिया की निगाहें इस संकट पर टिकी हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी हलचल वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दे सकती है। भारत के लिए यह सिर्फ भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का भी सवाल बन गया है।
Editorial

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