✕
अमित शाह ने जनता के सामने लाया 2027 जनगणना का रोडमैप..
By EditorialPublished on
भारत में एक बार फिर जनसंख्या की गिनती की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि देश की अगली जनगणना साल 2027 में कराई जाएगी। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह जनगणना खास होगी, क्योंकि इसमें डिजिटल माध्यम, स्व-गणना (Self Enumeration) और संभवतः जातिगत आंकड़े भी शामिल हो सकते हैं।

x

भारत सरकार ने देश की अगली जनगणना साल 2027 में कराने का फैसला लिया है। इसके लिए गृह मंत्रालय की ओर से एक अधिसूचना जारी की गई है, जो अब से प्रभावी मानी जाएगी। इस नई अधिसूचना ने 2019 में जारी पुराने आदेश को रद्द कर दिया है और इसी के साथ 2027 जनगणना की औपचारिक शुरुआत भी हो चुकी है।
1 मार्च 2027 होगी आधार तिथि, पहाड़ी इलाकों में 1 अक्टूबर 2026 :
जनगणना के लिए देश के अधिकतर हिस्सों में 1 मार्च 2027 की आधी रात को आधार तिथि माना जाएगा। वहीं, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे और दुर्गम क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 को आधार तिथि तय किया गया है। सरकार ने यह निर्णय मौसम की विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया है, ताकि सर्वे कार्य समय पर और सटीक रूप से पूरा किया जा सके।
16वीं जनगणना, आज़ादी के बाद 8वीं बार होगा राष्ट्रीय जनसर्वेक्षण :
यह जनगणना भारत में अब तक की 16वीं जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद आठवीं बार राष्ट्रीय स्तर पर यह सर्वेक्षण किया जाएगा। पहली जनगणना 1872 में की गई थी, लेकिन तब से यह प्रक्रिया हर 10 साल में नियमित रूप से हो रही है।
दो चरणों में होगी जनगणना: मकान सूचीकरण और व्यक्तिगत डेटा संग्रहण :
जनगणना की प्रक्रिया को 2027 में भी दो चरणों में पूरा किया जाएगा:
- पहला चरण – मकान सूचीकरण (Housing Listing):इसमें हर घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (जैसे बिजली, पानी, शौचालय), और संपत्ति से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की जाएंगी।
- दूसरा चरण – जनगणना (Population Enumeration):इस चरण में घरों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, लिंग, शिक्षा, पेशा और अन्य सामाजिक-आर्थिक विवरण दर्ज किए जाएंगे।
इस दो-चरणीय प्रक्रिया से सरकार को देश की जनसंख्या और जीवन स्तर का सटीक डाटा मिलेगा, जो भविष्य की नीति-निर्माण और योजनाओं की दिशा तय करेगा।
जनगणना का महत्व और प्रक्रिया :
भारत में हर 10 साल में जनगणना कराई जाती है, जिससे सरकार को देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, शिक्षा स्तर, रोजगार, रहन-सहन जैसे अनेक पहलुओं की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर नीतियां तैयार होती हैं, बजट तय होते हैं, और विकास की दिशा निर्धारित होती है।
जनगणना कराने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के पंजीयक सामान्य और जनगणना आयुक्त कार्यालय (Office of Registrar General and Census Commissioner) की होती है। इसके लिए लाखों की संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्र करते हैं।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
डिजिटल जनगणना की ओर कदम ?
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बार डिजिटल जनगणना, मोबाइल ऐप, और स्व-गणना (Self-Enumeration) जैसे आधुनिक तरीकों को भी अपनाने की तैयारी कर रही है। इससे डेटा की सटीकता, संग्रहण की गति और पारदर्शिता में बढ़ोतरी होगी।
2027 की जनगणना सिर्फ एक आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। इसमें जुटाए गए आंकड़े सामाजिक और आर्थिक योजनाओं का आधार बनेंगे और देश के हर नागरिक की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे।
यह भी पढे :

Editorial
Next Story
Related News
X
