ईरान ने खोल दिया जंग का मोर्चा; आसमान बना रणभूमि!
मिडिल ईस्ट में तनाव ने एक बार फिर वैश्विक स्थिरता को हिला कर रख दिया है। 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ शुरू करते हुए उसके परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह हमला ईरान के मिसाइल केंद्रों, परमाणु संयंत्रों और सेना के कमांडर्स को निशाना बनाते हुए किया गया, जिसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने “बहुत ही सफल प्रारंभिक हमला” करार दिया है।
इस हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिकों के मारे जाने की खबर है। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, और आगे भी इजरायल कई ‘उपलब्धियां’ हासिल करने वाला है।
दुनिया दो खेमों में बंटी :
इस हमले के बाद दुनिया भर में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई देशों ने खुलकर इजरायल का समर्थन किया, वहीं कुछ देशों ने ईरान के पक्ष में खड़े होकर इजरायल के हमले की निंदा की। तीसरा खेमा उन देशों का है जिन्होंने इस टकराव में न्यूट्रल स्टैंड लेते हुए दोनों पक्षों से संयम की अपील की।
इजरायल के समर्थन में :
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे पश्चिमी देश इजरायल के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। इन देशों ने इजरायल के ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ की बात करते हुए उसके कदम को न्यायोचित ठहराया है।
ईरान के समर्थन में :
रूस, चीन, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, इराक, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, जॉर्डन, इंडोनेशिया, हौथी, हमास और अफगानिस्तान जैसे देशों ने इजरायल की कार्रवाई की तीखी निंदा की है और ईरान के साथ एकजुटता जाहिर की है।

न्यूट्रल और शांति की अपील करने वाले देश :
भारत, जापान, आयरलैंड, इटली, अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
वैश्विक संस्थाओं की प्रतिक्रिया

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) :

    महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों की आलोचना की है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और आगे किसी भी सैन्य उकसावे से बचने की अपील की।
  • IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) :

    IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि “परमाणु ठिकानों पर हमला गंभीर वैश्विक खतरा है।” उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और किसी भी सैन्य कार्रवाई से दूर रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र में तबाही फैल सकती है।
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  • NATO (नाटो):
    नाटो महासचिव मार्क रूटे ने इजरायल की एकतरफा कार्रवाई पर चिंता जताई और अपने सहयोगी देशों, खासकर अमेरिका से तनाव को कम करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
इजरायल-ईरान टकराव अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा। इसमें वैश्विक शक्तियों की संलिप्तता बढ़ती जा रही है और यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो यह टकराव विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।
Editorial

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