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हमले के पीछे वॉशिंगटन की साजिश; ईरान का अमेरिका पर वार
By EditorialPublished on
हमले की इजाज़त वॉशिंगटन से मिली थी! ईरान ने इजरायल के ताज़ा सैन्य हमले पर सीधा आरोप अमेरिका पर लगाते हुए कहा है कि इस तरह की आक्रामक कार्रवाई बिना अमेरिकी सहमति और सहयोग के मुमकिन ही नहीं थी। ईरानी विदेश मंत्रालय ने सख्त लहज़े में चेतावनी दी है कि अब सिर्फ इजरायल ही नहीं, अमेरिका भी इस हमले के 'खतरनाक नतीजों' का ज़िम्मेदार होगा। इस बयान के साथ ही मध्य पूर्व में टकराव और अधिक गहराता दिख रहा है, और अब जंग का दायरा वॉशिंगटन तक खिंचता नजर आ रहा है।

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मध्य पूर्व इस वक्त युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। शुक्रवार की सुबह इजरायल के 200 से ज्यादा फाइटर जेट्स ने ईरान की सरज़मीं पर कहर बरपा दिया। करीब 100 से अधिक ठिकानों पर एकसाथ हमला किया गया, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को भारी नुकसान पहुंचा है। इस भीषण हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ और चीफ ऑफ स्टाफ्स मारे गए, साथ ही नतांज जैसे प्रमुख संवर्धन केंद्रों पर काम कर रहे कई वैज्ञानिकों की भी मौत हो गई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई इस हमले से बौखला गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इजरायल को इस "घातक हमले" की कीमत चुकानी होगी। जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान ने 100 से ज्यादा ड्रोन इजरायल की ओर लॉन्च कर दिए हैं, जिनकी पुष्टि खुद इजरायली सेना ने की है।
ईरान ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करार दिया है, और अनुच्छेद 51 के तहत जवाबी कार्रवाई का अधिकार जताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूएन सुरक्षा परिषद से इस मामले में तत्काल और कठोर कदम उठाने की मांग की है।
इतना ही नहीं, ईरान ने अमेरिकी सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान का कहना है कि इस स्तर की आक्रामक कार्रवाई अमेरिका की मंजूरी और समर्थन के बिना संभव ही नहीं है। इसलिए अमेरिका को भी इस युद्ध के "खतरनाक नतीजों" के लिए ज़िम्मेदार माना जाएगा।
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ईरान ने मुस्लिम देशों, NAM सदस्य राष्ट्रों और वैश्विक शांति में विश्वास रखने वाले सभी देशों से अपील की है कि वे इस आक्रमण की निंदा करें और मिलकर इसका विरोध करें। ईरान का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक देश पर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति पर हमला है।
इस बीच, व्हाइट हाउस ने अपनी भूमिका से इनकार किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इजरायल ने यह हमला "एकतरफा और आत्मरक्षा" के तहत किया है। अमेरिका इसमें शामिल नहीं है और उसका फोकस केवल अपनी सेना की सुरक्षा पर है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को किसी भी हाल में अमेरिकी हितों या कर्मियों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।
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