सागवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। नगर के डूंगरपुर मार्ग स्थित संचावत वाटिका के महाराणा प्रताप किड्स वर्ड में बुधवार शाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से हिन्दू साम्राज्य दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन संघर्ष, उनकी वीरता और हिन्दू स्वराज की स्थापना के महान कार्यों को याद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रमेश पाठक, नगर संघचालक उमाकांत व्यास और विद्या भारती बांसवाड़ा के जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार ने छत्रपति शिवाजी के आदर्शों और उनकी नीतियों पर प्रकाश डाला।


छत्रपति शिवाजी महाराज: एक महान योद्धा और शासक

प्रारंभिक जीवन और संकल्प

मुख्य वक्ता ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि शिवाजी के समय में कोई मान्यता प्राप्त हिन्दू राजा नहीं था और चारों ओर अत्याचार, बलात्कार और दुराचार का माहौल था। ऐसे कठिन समय में छत्रपति शिवाजी महाराज ने "जैसे को तैसा" का सिद्धांत अपनाते हुए अन्यायियों को करारा जवाब देना प्रारंभ किया।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि शिवाजी महाराज ने मात्र नौ वर्ष की अल्पायु में ही हिन्दू साम्राज्य की स्थापना करने की दृढ़ प्रतिज्ञा ली थी। यह संकल्प उनके महान व्यक्तित्व और दूरदर्शिता का परिचायक था।


वीरता की शुरुआत

शिवाजी की वीरता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने मित्रों के साथ मिलकर एक किला जीत लिया था। यह घटना उनकी असाधारण रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।


प्रशासनिक और सैन्य नवाचार

आधुनिक प्रशासन की स्थापना

छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना और सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उनका प्रशासन न केवल कुशल था बल्कि जनकल्याणकारी भी था।

युद्ध कला में क्रांति

समर-विद्या में शिवाजी महाराज ने अनेक नवाचार किए। उन्होंने छापामार युद्ध और गोरिल्ला युद्धनीति की नई शैली विकसित की। मुख्य वक्ता ने स्पष्ट किया कि गोरिल्ला युद्धनीति और छापामार युद्धनीति के जनक मराठा ही थे। यह युद्ध पद्धति आज भी विश्व भर में अध्ययन का विषय है।


सांस्कृतिक पुनरुत्थान

भाषा और संस्कृति का संरक्षण

छत्रपति शिवाजी महाराज ने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं और दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया। उन्होंने मराठी और संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया, जो भारतीय भाषाओं के सम्मान और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

स्वाधीनता संग्राम के प्रेरणास्रोत

शिवाजी महाराज के कारण ही वे भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नायक के रूप में स्मरण किए जाने लगे। उनके आदर्श और सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।


स्वराज की अवधारणा

परावर्तन का कार्य

मुख्य वक्ता ने स्पष्ट किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने परावर्तन का महत्वपूर्ण कार्य किया था। उन्होंने केवल स्वाधीनता की लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि स्वराज की लड़ाई लड़ी, जिससे पूरा हिन्दू समाज जागृत हुआ।


आधुनिक संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका

व्यक्तित्व निर्माण का कार्य

मुख्य वक्ता ने बताया कि आज भारत में वही कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है जो कभी छत्रपति शिवाजी महाराज ने किया था। संघ शाखाओं के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण करने में लगा हुआ है।

हिन्दू पहचान की स्पष्टता

वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में देश भर में हिन्दू शब्द को लेकर भ्रम की स्थिति है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हिन्दू शब्द को समझना आवश्यक है।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांच महत्वपूर्ण उत्सव

मुख्य वक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष भर में पांच उत्सव मनाता आ रहा है और हिन्दू साम्राज्य दिवस को इन उत्सवों में शामिल किया गया है। यह निर्णय छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान को याद रखने और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


सांस्कृतिक कार्यक्रम

शिवाजी महाराज की जीवनी प्रस्तुति

कार्यक्रम में जयंत पाठक ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विस्तृत जीवनी प्रस्तुत की। उन्होंने शिवाजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके संघर्षों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

काव्य और संगीत

जयेश भाटिया ने शिवाजी महाराज के सम्मान में एक भावपूर्ण काव्य गीत प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित श्रोताओं के हृदय को गहराई से प्रभावित किया।


गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल रणैाली, अनुराग पाठक, वेलचंद पाटीदार, गिरीश सोमपुरा, श्याम भट्ट, यशवंत गवारिया, मनोज दीक्षित, प्रकाश व्यास, हरीश सोमपुरा, कन्हैयालाल भाटिया, प्रह्लाद भावसार, रणछोड भाटीया, नरेश खटीक, कान्तिलाल खटीक सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।


निष्कर्ष

यह कार्यक्रम न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज के महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर था बल्कि आज के संदर्भ में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता को समझने का भी मौका था। हिन्दू साम्राज्य दिवस का यह आयोजन सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम था।

Editorial

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