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महाकुंभ में 82 मौतों पर उपमुख्यमंत्री का जवाब; ‘दुख है जवाब..'
By EditorialPublished on
महाकुंभ 2025 की मौनी अमावस्या पर मची भगदड़ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां सरकार ने पहले 37 लोगों की मौत की पुष्टि की थी, वहीं अब एक नई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दिन भगदड़ में 82 लोगों की जान गई थी। इस नए आंकड़े ने न सिर्फ प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरे आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठा दिए हैं।

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प्रयागराज में जनवरी-फरवरी 2025 के बीच आयोजित महाकुंभ की मौनी अमावस्या (29 जनवरी) पर मची भगदड़ की त्रासदी एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले जहां उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हादसे में 37 लोगों की मौत की पुष्टि की थी, वहीं अब बीबीसी हिन्दी की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि वास्तविक मौतों की संख्या 82 थी। यह नया आंकड़ा महाकुंभ की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
सरकार की ओर से क्या कहा गया था ?
सरकार ने मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ में 37 लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा था कि प्रशासन ने तत्काल राहत व सहायता कार्य शुरू किया था। हर मृतक के परिवार को मुआवजा और आवश्यक सहायता दी गई। लेकिन बीबीसी की नई रिपोर्ट में मृतकों की संख्या दोगुनी से भी अधिक बताई गई है, जिससे सरकारी आंकड़ों पर संदेह की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया :
इस रिपोर्ट को लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछा गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आप लोग कुछ समाचार चला दें और मैं उसका जवाब दूं, ऐसा नहीं है। घटना दुखद थी और हर पीड़ित परिवार की सहायता की गई है।”
उन्होंने कहा कि महाकुंभ का आयोजन बहुत ही दिव्य और भव्य रहा, जिसमें 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया।“हमारी पूरी कोशिश रहती है कि कोई भी श्रद्धालु कुंभ में आए, तो वह सकुशल वापस जाए,” उन्होंने कहा। “जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति हमारी संवेदना है और पहले भी थी, आज भी है।”
विपक्ष का हमला: अखिलेश यादव के तीखे सवाल :
बीबीसी की रिपोर्ट सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट अंत नहीं, बल्कि “महासत्य की खोज का आरंभ” है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “सत्य जब उजागर होता है, तो झूठ की परत-दर-परत खुलती जाती है… सूचना-प्रबंधन भी इसे रोक नहीं सकता।” उन्होंने सरकार से आठ सवाल पूछे और महाकुंभ में हुई मौतों को लेकर पारदर्शिता की मांग की।
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अब क्या आगे होगा ?
बीबीसी की रिपोर्ट ने जहां सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है, वहीं यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार कोई विस्तृत स्पष्टीकरण या नई जांच की घोषणा करती है या नहीं। विपक्ष ने जहां इस मुद्दे को उठाकर दबाव बनाया है, वहीं सरकार अपनी तैयारियों और संवेदनशीलता पर भरोसा जता रही है।
महाकुंभ जैसा आयोजन श्रद्धा, आस्था और व्यवस्था की एक बड़ी परीक्षा होता है। 66 करोड़ श्रद्धालुओं का आना एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन अगर किसी भी श्रद्धालु की जान गई, तो उसके पीछे की जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। बीबीसी की रिपोर्ट और डिप्टी सीएम की प्रतिक्रिया इस बहस को और गहरा कर गई है।
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