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जिन्ना के मोहब्बत की कहानी; नैनीताल का होटल बना गवाह
By EditorialPublished on
जिन्ना की मोहब्बत सिर्फ रुतबे तक सीमित नहीं थी, नैनीताल से भी था खास लगाव! मोहम्मद अली जिन्ना का नाम सुनते ही राजनीति और विभाजन की तस्वीर उभरती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन्ना का दिल नैनीताल की वादियों पर भी फिदा था। अपनी शादी के बाद जिन्ना ने हनीमून के लिए किसी विदेशी जगह को नहीं, बल्कि नैनीताल को चुना। यहां की शांत फिज़ाओं और हसीन वादियों में उन्होंने पूरे एक महीने तक अपनी नवविवाहित ज़िंदगी के खास लम्हे बिताए।

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भारत के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर इतिहास में कई कहानियां दर्ज हैं। आमतौर पर जिन्ना को एक सख्त और राजनीतिक नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने धर्म के आधार पर एक अलग देश की मांग करते हुए पाकिस्तान की नींव रखी। लेकिन इस गंभीर राजनीतिक छवि के पीछे एक बेहद निजी और कम चर्चित किस्सा छुपा है — उनका नैनीताल में बिताया गया हनीमून।
राजनीति से इतर एक प्रेम कहानी :
जिन्ना का जन्म 25 दिसंबर 1876 को कराची (तत्कालीन ब्रिटिश इंडिया) में हुआ था। पढ़ाई के लिए वो बॉम्बे यूनिवर्सिटी गए और फिर लंदन में कानून की पढ़ाई पूरी की। भारत लौटने के बाद उन्होंने मुस्लिम लीग ज्वाइन की और धीरे-धीरे मुस्लिमों के बड़े नेता बनकर उभरे। हालांकि, उनके जीवन का एक कोना ऐसा भी था, जिसमें राजनीति नहीं बल्कि प्रेम और निजी सुख-दुख शामिल थे।
जिन्ना ने रतन बाई से प्रेम विवाह किया था। यह शादी तब सुर्खियों में आई थी, क्योंकि रतन बाई एक पारसी परिवार से थीं और जिन्ना मुस्लिम। शादी के बाद दोनों हनीमून के लिए उत्तराखंड के नैनीताल पहुंचे। वहां वे शहर के सबसे भव्य मेट्रोपोल होटल में ठहरे। कहा जाता है कि यह होटल उस समय शाही अंदाज़ और लग्जरी का प्रतीक था।
मेट्रोपोल होटल का गौरवशाली अतीत :
मेट्रोपोल होटल की स्थापना 1880 में राजा महमूदाबाद ने की थी। नैनीताल के दिल में स्थित यह होटल अपने समय का सबसे बड़ा और शानदार होटल था। यहीं पर मोहम्मद अली जिन्ना और उनकी पत्नी रतन बाई ने लगभग एक महीना बिताया। होटल की सेवाएं, सुविधाएं और शाही माहौल जिन्ना को खासा पसंद आया था। आज भी स्थानीय लोग और इतिहासकार इस होटल को ‘जिन्ना की मोहब्बत की याद’ के रूप में याद करते हैं।
विवादों में घिरा होटल, बना पार्किंग स्थल :
पाकिस्तान के गठन के बाद राजा महमूदाबाद भी जिन्ना के साथ पाकिस्तान चले गए। इसके बाद भारत सरकार ने इस संपत्ति को एनिमी प्रॉपर्टी घोषित कर दिया। वर्षों तक कानूनी लड़ाई चलती रही। राजा महमूदाबाद के बेटे आमिर खान ने सुप्रीम कोर्ट तक जाकर इस संपत्ति के हक के लिए लड़ाई लड़ी और जीत भी हासिल की।
लेकिन मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में एक नया ऑर्डिनेंस लाया गया, जिसमें कहा गया कि एनिमी प्रॉपर्टी को किसी और को नहीं सौंपा जा सकता। नतीजतन, कोर्ट ने इस होटल की ज़मीन पर पार्किंग बनाने की अनुमति दे दी। आज मेट्रोपोल होटल की इमारत की जगह एक सरकारी पार्किंग तैयार की जा रही है।
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इतिहास की धूल में खोता एक रोमांटिक अध्याय :
एक समय जो जगह मोहब्बत और इतिहास की गवाह थी, आज वह धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में खोती जा रही है। जिन्ना और रतन बाई के नैनीताल के दिनों की यह यादें अब बस चंद किताबों और स्थानीय किस्सों में रह गई हैं। मेट्रोपोल होटल अब भले ही ना हो, लेकिन उसके किस्से आज भी नैनीताल की फिजाओं में गूंजते हैं।

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