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भारत पर लंदन में हमला: मोहम्मद यूनुस का रिश्तों पर जोरदार आरोप!
By EditorialPublished on
लंदन में मोहम्मद यूनुस का बयान: ‘भारत से कोई समस्या नहीं’, लेकिन इरादे कुछ और? लंदन में दिए एक हालिया बयान में मोहम्मद यूनुस ने कहा, “भारत हमारा पड़ोसी है और हम उनके साथ किसी भी तरह की समस्या नहीं रखना चाहते।” हालांकि, उनके इस नरम लहजे के पीछे छुपा मकसद कुछ और ही बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस इस तरह के बयान देकर अपने रणनीतिक साझेदार चीन को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। सामने कुछ और बोलना और पीछे कुछ और करना—यही यूनुस की सियासत का दोहरापन सामने ला रहा है।

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस एक बार फिर भारत को लेकर दिए अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित थिंक टैंक चैथम हाउस में बोलते हुए यूनुस ने भारत पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया और कहा कि, “भारत कहता कुछ है और करता कुछ और।”
शांतिपूर्ण रिश्तों की बात, लेकिन तीखा हमला :
भले ही यूनुस ने अपने बयान की शुरुआत “भारत हमारा पड़ोसी है, और हम उनके साथ कोई समस्या नहीं रखना चाहते” जैसी सौम्य बातों से की, लेकिन आगे चलकर उन्होंने भारत और खासतौर से भारतीय मीडिया पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि हर बार जब वह भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश करते हैं, तो चीज़ें “गलत दिशा में” जाने लगती हैं।
“भारतीय मीडिया फर्जी खबरें चलाता है, जिससे हमें बहुत गुस्सा आता है।” – मोहम्मद यूनुस
यूनुस के मुताबिक, बांग्लादेश की छवि को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि यह अब उनका “बड़ा काम” है कि वह बांग्लादेश को एक शांतिपूर्ण रास्ते पर लेकर जाएं।
चीन की ओर झुकाव, भारत से दूरी :
यूनुस के बयानों के पीछे की राजनीति को समझना भी जरूरी है। बांग्लादेश में जब से शेख हसीना की सरकार गई है और यूनुस को कार्यवाहक नेतृत्व मिला है, ढाका का झुकाव चीन की ओर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। भारत के साथ रिश्तों में आई तल्खी को इसी बदलाव की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस, भारत से रिश्तों की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उनके नीति-संकेत बीजिंग की ओर दोस्ती का इशारा करते हैं।
“कुछ कहते हैं, कुछ करते हैं” – यूनुस का दोहरापन ?
यूनुस ने कहा कि वह संवाद और शांति की कोशिश करते हैं, लेकिन “भारत अचानक कुछ कहता है, कुछ और करता है,” जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस सब के बीच गुस्सा वापस आ जाता है और रिश्ते सुधारने की कोशिशें अधूरी रह जाती हैं।
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राजनीति में नहीं रहना चाहते :
चैथम हाउस में जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या यूनुस आगे भी सरकार में बने रहना चाहेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा: “बिल्कुल नहीं, मुझे सरकार में कोई दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा कि उनके कैबिनेट (सलाहकार परिषद) के किसी भी सदस्य की ऐसी कोई मंशा नहीं है।
मोहम्मद यूनुस के बयानों से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर कड़वाहट का संकेत मिला है। एक ओर जहां वह शांति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके शब्दों में भारत के प्रति नाराजगी और अविश्वास झलकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है — और क्या यूनुस चीन की तरफ बढ़ते कदमों के साथ कोई नई नीति दिशा तय कर रहे हैं।

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