BSF जवान को मिली जर्जर ट्रेन: अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी पर जाते समय हुआ अपमान, 4 रेलवे अधिकारी निलंबित
एक गंभीर मामले की वजह से रेलवे प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी है जब अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर जाने वाले BSF जवान को एक जर्जर और अनुपयोगी ट्रेन प्रदान की गई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान घोषणा की कि


एक गंभीर मामले की वजह से रेलवे प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी है जब अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर जाने वाले BSF जवान को एक जर्जर और अनुपयोगी ट्रेन प्रदान की गई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान घोषणा की कि इस गंभीर लापरवाही के लिए रेलवे के चार अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। यह घटना देश की सुरक्षा में तैनात BSF जवान के साथ हुए व्यवहार की गंभीरता को दर्शाती है, जो अमरनाथ यात्रा जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात होने जा रहे थे।
अमरनाथ यात्रा 2025 की सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात होने वाले 1200 BSF जवान को दी गई ट्रेन की स्थिति इतनी खराब थी कि उसे देखकर जवान स्तब्ध रह गए। 6 जून को त्रिपुरा के उदयपुर रेलवे स्टेशन से जम्मू तवी स्टेशन के लिए रवाना होने वाली यह स्पेशल ट्रेन का हाल इतना बुरा था कि लगता था जैसे महीनों से इसका उपयोग ही नहीं हुआ हो। BSF जवान जो देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और अमरनाथ यात्रा जैसी संवेदनशील ड्यूटी के लिए जा रहे थे, उनके साथ यह व्यवहार अत्यंत निंदनीय है।
BSF जवान की वीरता और समर्पण का उदाहरण 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान देखा गया था, जिसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में BSF जवान की पीठ थपथपाते हुए कहा था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जब पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक आवासीय क्षेत्रों पर हमला किया, तब अकेले BSF के जम्मू फ्रंटियर ने 118 से अधिक पाकिस्तानी पोस्ट को तबाह कर दिया था। इसी BSF जवान के साथ रेलवे की यह लापरवाही राष्ट्रीय शर्म का विषय है।
अमरनाथ यात्रा 2025 की सुरक्षा के लिए जाने वाले BSF जवान को मिली ट्रेन की स्थिति का विवरण चौंकाने वाला है। ट्रेन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए थे, बिजली के उपकरण काम नहीं कर रहे थे, और टॉयलेट की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। सबसे घृणित बात यह थी कि ट्रेन के फर्श पर सैकड़ों कॉकरोच दौड़ रहे थे और अधिकांश सीटों पर गंदगी फैली हुई थी। यह BSF जवान के सम्मान और गरिमा के साथ खिलवाड़ था, जो अमरनाथ यात्रा की पवित्र सेवा के लिए जा रहे थे।
BSF जवान के लिए आयोजित इस विशेष ट्रेन की व्यवस्था एनएफ रेलवे मंडल गुवाहाटी द्वारा की गई थी। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए त्रिपुरा फ्रंटियर से सात कंपनी, गुवाहाटी फ्रंटियर से तीन कंपनी, और एम एंड सी फ्रंटियर की तीन कंपनी के कुल 1200 BSF जवान को एडहॉक 12वीं और 13वीं बटालियन के रूप में अमरनाथ यात्रा 2025 की ड्यूटी के लिए तैनात किया जाना था। इन वीर सैनिकों को उदयपुर, अमबासा, बदरपुर, गोलपारा और कूचबिहार रेलवे स्टेशन से स्पेशल ट्रेन नंबर 00709 में सवार होना था।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए जाने वाले BSF जवान के लिए रेलवे से विशेष सुविधाओं की मांग की गई थी। जवानों की सुगमता को ध्यान में रखते हुए, BSF की ओर से रेलवे से एसी 2 के दो कोच, एसी 3 के दो कोच, स्लीपर के 16 कोच और 4 जीएस/एसएलआर की मांग की गई थी। लेकिन जो ट्रेन प्रदान की गई, उसकी स्थिति BSF जवान के सम्मान के बिल्कुल विपरीत थी। यह वही BSF जवान हैं जो अमरनाथ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं।
BSF के कंपनी कमांडर द्वारा किए गए निरीक्षण में ट्रेन की स्थिति इतनी खराब पाई गई कि इसे मानव परिवहन के लिए अनुपयुक्त घोषित करना पड़ा। जांच में पता चला कि महीनों से इन वैगनों का उपयोग नहीं किया गया था। प्रत्येक वैगन में टूटी हुई वस्तुएं बिखरी पड़ी थीं, खिड़कियों और दरवाजों में छेद थे, और टॉयलेट सीटें पूरी तरह क्षतिग्रस्त थीं। BSF जवान के शस्त्र, आवास और भंडार के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध नहीं था। यह स्थिति अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए जाने वाले सैनिकों के साथ अन्याय था।
इस गंभीर मामले के बाद BSF के वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और रेलवे प्रशासन के साथ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। कंपनी कमांडर ने स्पष्ट रूप से बताया कि यह ट्रेन यात्रा के लिए उपयुक्त नहीं है और अमरनाथ यात्रा की आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी के लिए जाने वाले BSF जवान के लिए इस तरह की ट्रेन में सफर करना जोखिम भरा है। परिणामस्वरूप, 6 जून को रवाना होने वाली यह ट्रेन रद्द करनी पड़ी और BSF जवान को चार दिन प्रतीक्षा करनी पड़ी।
अंततः मंगलवार को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए जाने वाले BSF जवान को एक नई और उपयुक्त ट्रेन प्रदान की गई। एनएफआर जोन के वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि BSF जवान की कड़ी आपत्ति के बाद पुरानी ट्रेन रद्द की गई और नई व्यवस्था की गई। हालांकि, इस देरी के कारण अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए BSF जवान की तैनाती में भी विलंब हुआ। मूल योजना के अनुसार इन जवानों को 12 जून तक कश्मीर में तैनात किया जाना था।
यह घटना BSF जवान के सम्मान और अमरनाथ यात्रा की पवित्रता दोनों के साथ हुए अन्याय को दर्शाती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा अलीपुरद्वार मंडल के चार अधिकारियों को निलंबित करना उचित कदम है, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में BSF जवान और अमरनाथ यात्रा जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के साथ ऐसा व्यवहार न हो। देश की सुरक्षा में तैनात वीर सैनिकों का सम्मान राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

