भूपालसागर (विशेष संवाददाता)।
राजस्थान के भूपालसागर में एक के मामले में पुलिस की कथित निष्क्रियता के कारण पीड़ित पिता को पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। मामले में आरोपियों के प्रभावशाली होने के कारण स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता की आशंका जताई जा रही है।


घटना का विवरण

भूपालसागर पुलिस थानान्तर्गत पारी गांव के निवासी शंकरलाल गाडरी की नाबालिग बेटी का अपहरण तीन दिन पहले हुआ था। पिता के अनुसार, कबीर की भागल निवासी हीरालाल पुत्र रामेश्वर गाडरी और गुढा निवासी लेहरू पिता भेरा गाडरी ने मिलकर उसकी बेटी को उठाकर ले गए हैं।

अपहरणकर्ताओं की दुस्साहसिक हरकत यहीं नहीं रुकी। पीड़ित पिता के अनुसार, अपहरणकर्ता अब धमकी भरे लहजे में कह रहे हैं कि बेटी वापस नहीं मिलेगी और यदि उसे चाहिए तो रुपए देकर ले ले। यह रवैया इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।


पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप

शंकरलाल गाडरी ने पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी को सौंपे गए पत्र में भूपालसागर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि आरोपी ऊंचे रसूख वाले हैं।

पीड़ित पिता का कहना है कि सूचना देने के बावजूद भी पुलिस उसकी पुत्री को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से नहीं छुड़ा पाई है। इस कारण परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।


परिवार की दुर्दशा

इस त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह है कि पूरा परिवार इस सदमे से टूट चुका है। पीड़ित पिता के अनुसार, बेटी की याद में उसकी पत्नी बेहोश पड़ जाती है। वहीं छोटा बच्चा भी अपनी बहन की याद में बीमार पड़ा है। यह स्थिति किसी भी परिवार के लिए असहनीय है और इसे देखते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।


थानाधिकारी का पक्ष

मामले में भूपालसागर थानाधिकारी लादूलाल खटीक का कहना है कि 24 मई को मुकदमा दर्ज करके जांच-अनुसंधान प्रारंभ कर दिया गया था। हालांकि, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। यह विरोधाभास इस बात को दर्शाता है कि या तो जांच की गति धीमी है या फिर पुलिस की प्राथमिकताएं सही जगह नहीं हैं।


आरोपियों का विवरण

पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में तीन व्यक्तियों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दी है:

  1. हीरालाल पुत्र रामेश्वरलाल गाडरी - उम्र 21 वर्ष, निवासी कबीरजी की भागल
  2. रामेश्वर पुत्र डालू गाडरी - उम्र 45 वर्ष, निवासी कबीरजी की भागल
  3. लेहरू पुत्र भेरा गाडरी - उम्र 50 वर्ष, निवासी गुढा, पुलिस थाना आकोला


कानूनी पहलू

नाबालिग का अपहरण एक गंभीर अपराध है जिसके तहत POCSO Act के अलावा IPC की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई होती है। इस मामले में विशेष रूप से चिंताजनक बात यह है कि अपहरणकर्ता फिरौती की मांग कर रहे हैं, जो मामले को और भी गंभीर बनाता है।

सामाजिक चिंता

यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है बल्कि यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा एक सामाजिक जिम्मेदारी है और इसमें कोई चूक स्वीकार्य नहीं है।

पुलिस अधीक्षक से अपील

घबराहट की स्थिति में पीड़ित पिता 5 जून को पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के पास गया और अपनी पीड़ा सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई। यह कदम दर्शाता है कि स्थानीय पुलिस व्यवस्था में उसका भरोसा उठ चुका है।

आगे की राह

अब यह देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। नाबालिग की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।


निष्कर्ष

यह मामला पुलिस व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है। जब आम नागरिक को न्याय के लिए उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़े तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद मामले में तत्काल प्रगति होगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि समाज में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा के लिए और भी कड़े उपाय करने की आवश्यकता है। केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनका सख्त क्रियान्वयन भी जरूरी है।

Editorial

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