नहीं सुधरेगा पाकिस्तान! आतंकी सफाई पर बिलावल भुट्टो ने अमेरिका पर ही फोड़ा ठीकरा
पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ आया है जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने अमेरिका की धरती पर ही अमेरिका के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी-हजूरी में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ बिलावल भुट्टो ने आतंकवाद के लिए अमेरिका को ही जिम्मेदार बता दिया है। यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक दुविधा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।


वॉशिंगटन। पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ आया है जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने अमेरिका की धरती पर ही अमेरिका के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी-हजूरी में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ बिलावल भुट्टो ने आतंकवाद के लिए अमेरिका को ही जिम्मेदार बता दिया है। यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक दुविधा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
बिलावल भुट्टो का वॉशिंगटन मिशन
बिलावल भुट्टो इन दिनों भारत की नकल करते हुए बीते दिनों हुए संघर्ष की जानकारी देने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका पहुंचे हैं। बिलावल भुट्टो का यह दौरा उस समय आया है जब पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव चरम पर है। हालांकि, उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की स्थिति को अमेरिकी नेतृत्व के सामने रखना था, लेकिन बिलावल भुट्टो ने जो बयान दिए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं।
बिलावल भुट्टो ने वॉशिंगटन पहुंचकर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान को अमेरिकी सहायता की सख्त जरूरत है।
अफगानिस्तान वापसी पर बिलावल भुट्टो का आरोप
बिलावल भुट्टो ने अपने आरोपों में सबसे मुख्य बात यह कही कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से वापस जाने के बाद से पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बिलावल भुट्टो का दावा है कि अमेरिकी सैनिकों द्वारा छोड़े गए उपकरण और हथियार आतंकवादी समूहों के हाथ लगे हैं, जिससे आतंकी घटनाओं में वृद्धि हुई है।
यह आरोप काफी गंभीर है क्योंकि बिलावल भुट्टो सीधे तौर पर अमेरिका को आतंकवाद फैलाने का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी वापसी के बाद जो शक्ति शून्यता पैदा हुई है, उसका फायदा आतंकी संगठन उठा रहे हैं।
बिलावल भुट्टो की विरोधाभासी स्थिति
दिलचस्प बात यह है कि बिलावल भुट्टो इस दौरान अपने गिरेबान में झांकना भूल गए। दशकों से आतंकियों को पाल रहे पाकिस्तान के एक प्रमुख नेता होने के नाते बिलावल भुट्टो का यह रुख काफी विरोधाभासी लगता है। एक तरफ वे अमेरिका को आतंकवाद का जिम्मेदार बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की बात भी कर रहे हैं।
बिलावल भुट्टो ने कहा, "हमें अधिक क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।" यह बयान उनकी पहली टिप्पणी के बिल्कुल विपरीत है। यह दिखाता है कि बिलावल भुट्टो की रणनीति में स्पष्टता नहीं है।
अमेरिकी मौनता का मतलब
बिलावल भुट्टो की इन गंभीर टिप्पणियों पर अमेरिका ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह अमेरिकी मौनता कई मायनों में महत्वपूर्ण है। हो सकता है कि अमेरिका बिलावल भुट्टो के इन आरोपों को गंभीरता से नहीं ले रहा हो, या फिर वे किसी रणनीतिक कारण से चुप हैं।
बिलावल भुट्टो के ये आरोप उस समय आए हैं जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी खराब है और उसे अंतर्राष्ट्रीय सहायता की सख्त जरूरत है। ऐसे में अमेरिका पर आरोप लगाना पाकिस्तान के हित में नहीं लगता।
अमेरिकी कांग्रेसमैन की पूर्व चेतावनी
बिलावल भुट्टो के इन आरोपों से पहले ही अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर लताड़ लगाई थी। पिछले सप्ताह अमेरिकी कांग्रेसमैन ब्रैड शर्मन ने वॉशिंगटन में बिलावल भुट्टो को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने को कहा था। शर्मन ने बिलावल भुट्टो से जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को खत्म करने की मांग की थी। यह स्पष्ट संदेश था कि अमेरिका पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजन को अच्छी तरह समझता है।
अमेरिकी कांग्रेसमैन ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अहमदिया समुदाय को बिना किसी भेदभाव के अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की इजाजत मिलनी चाहिए। यह टिप्पणी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर सीधा प्रहार था।
पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति
बिलावल भुट्टो के ये बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को भी दर्शाते हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिलावल भुट्टो जैसे नेता अमेरिका पर ही आरोप लगा रहे हैं।
यह विरोधाभास दिखाता है कि पाकिस्तान में विदेश नीति को लेकर स्पष्टता नहीं है। बिलावल भुट्टो का यह रुख उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का भी परिचायक हो सकता है।
भविष्य की चुनौतियां
बिलावल भुट्टो के इन आरोपों से पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। अमेरिका पहले से ही पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजन से परेशान है, और अब बिलावल भुट्टो के ये आरोप स्थिति को और भी जटिल बना सकते हैं। पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति में स्पष्टता लानी होगी। बिलावल भुट्टो जैसे नेताओं को समझना होगा कि आतंकवाद का असली कारण पाकिस्तान की नीतियां हैं, न कि अमेरिकी कार्रवाई।
बिलावल भुट्टो का यह अमेरिकी दौरा पाकिस्तान की राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है। एक तरफ देश को अंतर्राष्ट्रीय सहायता की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ उसके नेता उन्हीं देशों पर आरोप लगा रहे हैं जिनसे मदद चाहिए। बिलावल भुट्टो को समझना होगा कि आतंकवाद की जड़ें पाकिस्तान की मिट्टी में हैं, किसी बाहरी शक्ति में नहीं।

