World Bank Steps Back from Indus Fight ; Pakistan Stands Alone
5/9/2025 4:47:30 PM
भारत से बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुंह की खाता नजर आ रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को सस्पेंड किए जाने पर पाकिस्तान ने विश्व बैंक से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। लेकिन शुक्रवार (09 अप्रैल, 2025) को विश्व बैंक ने अपनी भूमिका सीमित बताते हुए पाकिस्तान की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
"हम कुछ नहीं कर सकते" – विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने साफ शब्दों में कहा, “हमारी भूमिका केवल एक मध्यस्थ की है। मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि विश्व बैंक इस मुद्दे को कैसे सुलझाएगा, लेकिन यह सब बकवास है। हम कुछ नहीं कर सकते।” इस दो-टूक बयान ने पाकिस्तान को उस समय गहरा झटका दिया जब वह भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की योजना बना रहा था।
पाकिस्तान की रणनीति धरी की धरी रह गई :
पाकिस्तान के कानून और न्याय राज्य मंत्री अकील मलिक ने हाल ही में रॉयटर्स को बताया था कि इस्लामाबाद इस मामले में कम से कम तीन अलग-अलग कानूनी विकल्पों पर काम कर रहा है। इसमें विश्व बैंक के पास शिकायत दर्ज करना एक प्रमुख कदम माना जा रहा था। लेकिन अजय बंगा के बयान के बाद पाकिस्तान की यह रणनीति पूरी तरह फेल हो गई है।
भारत का रुख स्पष्ट – “अपने हक का पानी, अपने लिए” :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अब भारत अपने हिस्से के सिंधु जल का पूरा उपयोग करेगा। उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में कहा: “भारत के हक का पानी, भारत के हक में बहेगा।” इसका सीधा संदेश यह था कि भारत अब उन नदियों के जल पर भी काम करेगा, जिन्हें संधि के तहत पाकिस्तान के लिए छोड़ा गया था, लेकिन जिनका उपयोग भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है।
क्या है सिंधु जल संधि ?
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत भारत को तीन पूर्वी नदियाँ रावी, व्यास और सतलुज, और पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ सिंधु, झेलम और चेनाब के जल उपयोग का अधिकार दिया गया था। हालांकि भारत ने अब तक इस संधि का सम्मान किया है, लेकिन आतंकवादी हमलों और पाकिस्तान के निरंतर उकसावे के बाद अब यह संधि भी पुनः मूल्यांकन के दायरे में आ गई है।
पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। विश्व बैंक का "हाथ खड़े कर देना" न केवल पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति और जल कूटनीति की बड़ी सफलता भी मानी जा रही है। आने वाले समय में भारत की सिंधु जल नीति और भी आक्रामक हो सकती है, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
Editorial

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