ऑपरेशन सिंदूरपर मुस्लिम अवाम का गुस्सा;
5/9/2025 5:18:38 PM
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर पूरे देश में जश्न का माहौल है, और इस खुशी में महाराष्ट्र के ठाणे का मुस्लिम समुदाय भी पूरे जोश के साथ शामिल हुआ। शुक्रवार (9 मई) को जुमे की नमाज़ के बाद सैकड़ों लोगों ने इकट्ठा होकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, मिठाइयाँ बांटी और भारत की सेना, खासकर कर्नल सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह जैसी जांबाज़ बेटियों को सलाम किया।
"एड़ियां उचकाने से कुछ नहीं होता, किरदार में दम होना चाहिए" :
लोगों ने पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि भारत को आँख दिखाने वालों को करारा जवाब मिले। एक बुज़ुर्ग ने कहा, "हमारी शेरनी, भारत की बेटी कर्नल सोफिया कुरैशी ने जाकर उनकी छाती पर मारा है। किरदार में दम हो तो बात बने। ऐसी बेटियाँ भारत में और भी हैं।" "अभी तो दो बेटियाँ उतरी हैं..." मीडिया से बातचीत में एक युवक ने कहा: "अभी तो दो बेटियाँ गई हैं। अगर मिशन दस दिन और चला तो पाकिस्तान का नक्शा ही खत्म हो जाएगा। ये तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।"एक अन्य युवा ने उत्साह से कहा कि पूरा हिंदुस्तान खुश है क्योंकि अब दुश्मन को घर में घुसकर मारा गया है।

"पाकिस्तान बेबस और लाचार हो गया है" :
कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ नारों के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ। समुदाय के लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को लग रहा था वह पहलगाम में हमला कर आराम से निकल जाएगा, लेकिन अब उसे पता चल गया है कि हिंदुस्तान क्या कर सकता है। "भारत ने बिल्कुल सही किया एक शख्स ने भावुक होकर कहा: "जो भी निर्दोषों की जान ले, वो इंसान नहीं है। पाकिस्तान ने धर्म के नाम पर मासूमों की हत्या की। भारत ने जो किया, वो हर सभ्य राष्ट्र करता – अपने लोगों की रक्षा और आतंकवाद को जड़ से खत्म करना।"
"मिशन सिंदूर को सलाम!" :
इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा कर्नल सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह की रही, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों का कहना था कि जब बेटियाँ इतना कर सकती हैं, तो सोचिए जब पूरा हिंदुस्तान एकजुट होकर खड़ा हो जाए तो क्या होगा। भारत का मुस्लिम समाज भी अब खुलकर देश की सेना और सरकार के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। ठाणे की यह तस्वीर न सिर्फ पाकिस्तान को एक संदेश है, बल्कि देश के भीतर भी एकता, देशभक्ति और आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प का प्रतीक बनकर उभरी है।
Editorial

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