Jammu on Edge: Madrassas, Mosques Under Scanner
5/8/2025 6:55:15 PM
सीमा पर पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी के बाद जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। हमले में 16 लोगों की मौत और 44 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ऐसे कठिन समय में मुस्लिम समुदाय के विद्वानों और संस्थानों ने इंसानियत की मिसाल पेश की है।
मुस्लिम धर्म के प्रमुख विद्वान मुफ्ती सगीर अहमद ने ऐलान किया है कि जम्मू क्षेत्र के सभी मदरसे और मस्जिदें विस्थापित लोगों के लिए खोल दी गई हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों से आने वाले सभी लोगों को शरण, भोजन और हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

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मुफ्ती सगीर अहमद ने बठिंडी के मरकज-उल-मारिफ मदरसे में एक रक्तदान शिविर का आयोजन कर समाज को यह संदेश दिया कि “इस्लाम हमें सिखाता है कि एक जान बचाना पूरी मानवता को बचाने के बराबर है।” इस शिविर में दर्जनों युवाओं के साथ उन्होंने खुद भी रक्तदान किया।
उन्होंने बताया कि 50 यूनिट से अधिक रक्त जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ब्लड बैंक में भेजा गया है। मदरसे के शिक्षक और छात्र दोनों ही इस नेक कार्य में भाग ले रहे हैं।
मुफ्ती अहमद ने कहा, “हमने अपने सभी संस्थानों को पूरी तरह तैयार रखा है, ताकि अगर लोगों को स्थानांतरित करना पड़े, तो उन्हें सुरक्षित स्थान दिया जा सके।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से हो।
इस बीच जामिया जियाउल-इस्लाम नामक एक और शैक्षणिक संस्थान ने लगभग 50 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया है और आश्वासन दिया है कि ज़रूरत पड़ने पर और लोगों को भी जगह दी जाएगी।
जब एक ओर बॉर्डर पर गोलियां चल रही हैं, तो दूसरी ओर समुदाय का यह समर्थन आपसी भाईचारे और मानवता की एक मजबूत तस्वीर पेश कर रहा है।
Editorial

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