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पतंजलि में म्यूजियम ऑफ ऑरिजिन एवं कॉन्टिनम विषय पर सम्मेलन सम्पन्न
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बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियो साइंस, पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के सहयोग से ‘म्यूजियम ऑफ ऑरिजिन एवं कॉन्टिनमʼ विषय पर इतिहास के एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें स्वामी रामदेव महाराज एवं आचार्य बालकृष्ण महाराज के साथ देश के प्रबुद्ध इतिहासविद, भू-वैज्ञानिक एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के विद्वानों ने विचार मंथन किया।

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हरिद्वार। बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियो साइंस, पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के सहयोग से ‘म्यूजियम ऑफ ऑरिजिन एवं कॉन्टिनमʼ विषय पर इतिहास के एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें स्वामी रामदेव महाराज एवं आचार्य बालकृष्ण महाराज के साथ देश के प्रबुद्ध इतिहासविद, भू-वैज्ञानिक एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के विद्वानों ने विचार मंथन किया।

सम्मेलन में एनएएसी कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धि ने कहा कि पतंजलि के द्वारा इतिहास लेखन व प्रामाणिकरण के लिए जो कार्य किया जा रहा है वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा व लोगों को अपने मूल के साथ जोड़ेगा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक डॉ. वाई.एस. रावत ने कहा कि पतंजलि के द्वारा इतिहास के संरक्षण का अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पतंजलि के द्वारा पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए किया जा रहा कार्य वैश्विक इतिहास को पुनर्जीवित करेगा।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि भारत के गौरवमयी इतिहास को जानबूझकर छिपाया गया है। पतंजलि के द्वारा भारत के स्वर्णिम इतिहास के संरक्षण का दायित्व अब पतंजलि ने उठाया है। कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि भारतीय इतिहास ही वास्तविक रूप में विश्व का इतिहास है, और हम वैश्विक मंच पर अपने प्राचीन इतिहास व शास्त्रीय परंपराओं एवं ज्ञान-विज्ञान को पुनः प्रतिष्ठित करने का कार्य कर रहे हैं। सम्मेलन में बीएसआईपी के निदेशक प्रो. एम.जी. ठक्कर ने ‘अवधारणाओं की रूपरेखाʼ तथा पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन के इतिहास एवं पुरातत्व विज्ञान की प्रमुख डॉ. रश्मि मित्तल ने ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानव जाति के इतिहास पर नई अंतर्दृष्टिʼ विषय पर परिचयात्मक प्रस्तुति दी।



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