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देशभर में वॉर्निंग सायरन की तैयारी; गृह मंत्रालय का अलर्ट
By EditorialPublished on
देश की सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट! रॉकेट, मिसाइल और हवाई हमलों से निपटने की तैयारी के तहत गृह मंत्रालय में हाई लेवल मीटिंग चल रही है। इस अहम बैठक में एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस, डीजी फायर, एयर डिफेंस और राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं। जल्द ही पूरे देश में रेड वॉर्निंग सायरन की व्यवस्था पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
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5/6/2025 1:12:04 PM
देश की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 7 मई को होने वाली मॉक ड्रिल को लेकर गृह मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक की शुरुआत हो गई है। यह बैठक गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में नॉर्थ ब्लॉक स्थित मंत्रालय में हो रही है। इसमें 244 सिविल डिफेंस जिलों के प्रतिनिधि, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस डीजी, डीजी फायर, एयर डिफेंस और सभी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं।
हमले जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी पर ज़ोर :
बैठक का मुख्य उद्देश्य 7 मई को आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल की तैयारियों और समन्वय को सुनिश्चित करना है। यह अभ्यास विशेष रूप से रॉकेट, मिसाइल और हवाई हमलों जैसी आपातकालीन स्थितियों पर केंद्रित रहेगा। सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में इस ड्रिल को गंभीरता से लागू किया जाएगा, जहां रेड वार्निंग सायरनों और ब्लैकआउट की व्यवस्था भी की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर हमले के बाद आई तेजी :
गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा तैयारियों को लेकर यह व्यापक पहल की गई है। गृह मंत्रालय ने मॉक ड्रिल को एक राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा अभ्यास के रूप में चिन्हित किया है।
सायरन बजेंगे, ब्लैकआउट होगा, प्रशिक्षण भी मिलेगा :
इस मॉक ड्रिल के दौरान एयर रेड वार्निंग सायरन बजाए जाएंगे, जिससे नागरिकों को खतरे की पूर्व सूचना दी जा सके। साथ ही क्रैश ब्लैकआउट की रणनीति भी अपनाई जाएगी, जिसमें हमले के दौरान सभी लाइटें बंद कर शहरों और संवेदनशील ढांचों को छिपाया जाएगा। छात्रों और नागरिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा कि ऐसे हालात में कैसे सुरक्षित रहना है।
राष्ट्रीय समन्वय का संकेत :
राज्यों के मुख्य सचिवों की मौजूदगी इस बैठक को और भी अहम बनाती है। यह न केवल प्रशासनिक सजगता का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर पूरी तरह से एकजुट हैं।

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